कुल्लू। घाटी की सुख-शांति के लिए पाथला के देवता अग्निपाल करीब पांच दशक बाद परिक्रमा पर निकले हैं। देवता अपने क्षेत्रों के विभिन्न गांवों में जाकर देव परंपरा का निर्वहन करेंगे। पटाधी सहित अन्य गांवों के बाद देवता अब कशाधा गांव में पहुंचे। कशाधा में देवता जौड़ा नारायण के साथ देवता अग्निपाल का भव्य देवमिलन हुआ।
देवमिलन को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सोमवार को कशाधा गांव में देवता को धूप पिलाने की रस्म निभाई गई। महिलाओं ने कुल्लवी परिधानों में सजकर देवता को धूप देने की रस्स निभाई। देवता को धूप पिलाने के लिए महिलाओं को निराहार रहना होता है। इसके बाद ही महिलाएं भोजन करती हैं। बताया जा रहा है कि घाटी की सुख-शांति के लिए देवता की ओर से इस तरह की परिक्रमा काफी सालों बाद की जाती है। पाथला गांव के देवता अग्निपाल की परिक्रमा को लेकर हारियानों में खुशी की लहर है। परिक्रमा पूरी करने के बाद देवता का देवालय लौटने पर भव्य स्वागत भी किया जाएगा। संवाद