कुल्लू। दशहरा उत्सव के तीसरे ढालपुर में कुष्टू काहिका देखने के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ी। देवरथों के साथ काहिका में देवताओं ने परिक्रमा की। देवलू ढोल-नगाड़ों के साथ झूूमे। यह नजारा दशहरे में लोगों के लिए एकदम अलग था। बताया जा रहा है कि ढालपुर में दशकों को बाद हुआ है।
आम तौर पर दशहरा में लोगों को इस तरह का नजारा देखने को नहीं मिलता है। लेकिन रविवार को कुष्टू काहिका ने दशहरा की रौनक को चार गुना और बढ़ा गया। सुबह ही लोग ढालपुर मैदान में पहुंचना शुरू हो गए थे। बिजली महादेव के अस्थायी शिविर के पास देवलुओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। बड़ी मशक्कत से लोगों को पीछे करना पड़ा। पुलिस के जवान भी तैनात थे। जब कुष्टूू काहिका की परिक्रमा शुरू हुई तो सैकड़ों लोग इसे देखने के लिए उमड़ पड़े। करीब तीन घंटे तक कुष्टू काहिका का लोगों ने भरपूर आनंद लिया। घाटी के बुजुर्ग ओम प्रकाश, मेहर सिंह और नत्थू राम ने कहा कि करीब पांच पीढ़ियों के बाद इस तरह का काहिका देखने का अवसर मिला है। देवी-देवताओं के पास काहिका का आयोजन होता रहता है। लेकिन ढालपुर में कुष्टू काहिका का महत्व कुछ अलग हैं। इसमें देवी-देवता भी वे ही शामिल होते हैं, जो सदियों पहले काहिका में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुके हैं।
काहिका की रस्म पूरा होते ही शुरू हुई बारिश
कुष्टू काहिका की रस्म देवी देवताओं की अगुवाई में पूरा होते ही बारिश भी शुरू हुई। यह शुभ संकेत माना जाता है। देवताओं ने इसका साक्षात प्रमाण दिया है कि कुष्टू काहिका सफल रहा है। हालांकि, कुष्टू काहिका में रथ और घंटी, धड़छ सहित एक दर्जन देवी-देवता ही शामिल हुए।
जीप में भरकर लाए गए थे गेहूं और जौ का आटा
शुद्धि के लिए करवाए गए कुष्टू काहिका में लोगों पर गेहूं और जौ का आटा फेेंका गया। सीता (महिला) की ओर से जौ फेंके गए। इसके लिए एक जीप में भरकर आटा और जौ लाए गए थे। परिक्रमा के दौरान जौ और आटे से लदी जीप साथ-साथ चलती रही।