150 गरीब बच्चों को सैनिक, नवोदय और एकलव्य स्कूलों में दिला चुकी हैं प्रवेश
ड्यूटी के बाद गटुक घर पर ही बच्चों को निशुल्क देती है ट्यूशन
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। ज्ञान की पाठशाला में खुद को तपाकर लाहौल-स्पीति की छेरिंग गटुक अब समाज में शिक्षा की लौ जला रही हैं। पेशे से शिक्षिका छेरिंग गटुक समाज के गरीब तबके के सैकड़ों बच्चों को सैनिक, नवोदय और एकलव्य स्कूलों में दाखिला दिलवा चुकी हैं।
दरअसल, छेरिंग गटुक स्कूल में ड्यूटी पूरी करने के बाद घर पर ही गरीब बच्चों को सैनिक और नवोदय जैसे आवासीय स्कूलों में प्रवेश परीक्षा के लिए निशुल्क कोचिंग दे रही हैं। हालांकि, उनके पास कोई सटीक आंकड़ा तो नहीं है, लेकिन बताते हैं कि पिछले 15 साल में उनके पढ़ाए करीब 150 विद्यार्थी सैनिक और जवाहर नवोदय के अलावा एकलव्य स्कूल में प्रवेश पा चुके हैं। कई बच्चे तो अब आईआईटी और नीट परीक्षा पास कर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं। बड़ी बात यह है कि छेरिंग गटुक बच्चों से बिना ट्यूशन फीस लिए निशुल्क पढ़ा रही हैं।
राज्य पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं गटुक
हिमाचल सरकार ने साल 2017 में विशिष्ट कार्यों एवं छात्र छात्रों के चारित्रिक, शारीरिक और सांस्कृतिक विकास के लिए राज्य शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया था। राज्य सरकार ने उन्हें एक दिसंबर 2024 से 30 नवंबर 2025 तक सेवा विस्तार दिया है।
पढ़ाई का जुनून, बेटी के साथ ली स्नातक की डिग्री
शिक्षिका छेरिंग गटुक कनिष्ठ बुनियादी अध्यापिका के पद पर 1989 से 2007, साल 2008 से 2010 तक हेड टीचर, 2010 से 2021 तक केंद्र मुख्य शिक्षक, 2022 से 2024 तक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत रहीं। वर्ष 2014 में 51 साल की उम्र अपनी बड़ी बेटी के साथ स्नातक की पढ़ाई पूरी की।