जहां कुल्लू जिला की नगर परिषद और नगर पंचायत में कांग्रेस का दबदबा रहा
है। वहीं कुल्लू नगर परिषद की दोनों प्रमुख सीटें पर सगे भाभी-देवर काबिज
हुए हैं। दोनों देवर-भाभी अब पांच साल तक नगर परिषद कुल्लू की सरकार
चलाएंगे। सोमवार को दोनों पदों के लिए एक-एक नामांकन भरे गए थे। लिहाजा, इस
दौरान कुल्लू में भाजपा बिल्कुल खामोशी साधे बैठी रही।
गौर रहे कि
कुल्लू नगर परिषद में बिमला महंत घांपो अध्यक्ष और गोपाल कृष्ण महंत
उपाध्यक्ष काबिज हुए। दोनों आपस में सगे देवर-भाभी हैं। दोनों कांग्रेस
पार्टी से संबंध रखते हैं। उल्लेखनीय है कि गोपालकृष्ण महंत पूर्व में नगर
परिषद के अध्यक्ष भी रहे हैं। वहीं बिमला महंत घांपो पार्षद रहीं। इस बार
दोनों कुर्सी एक परिवार के हाथ लगने से अब यह देखना है बाकी रह गया है कि
नगर परिषद कुल्लू का विकास क्या गति पकड़ता है? यह आने वाला समय ही बताएगा।
जिस तरह से लोगों ने दोनों देवर-भाभी को चुना है। इससे लोगों में अब नगर
परिषद के वार्डों में विकास की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद जग गई है।
गौरतलब
है कि नगर परिषद कुल्लू में पहली बार करीब 25 वर्षों बाद महिला अध्यक्ष
बनीं है। वर्ष 1953 से लेकर आज तक कुल्लू नगर परिषद की प्रमुख सीट पर पुरुष
का कब्जा रहा है। जबकि इस बार महिला अध्यक्ष बनने पर नगर परिषद कुल्लू के
अधीन आते लोगों में रुके पड़े विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाए जाने की
खासी उम्मीदें हैं। जैसे ही सोमवार को ढाई बजे बिमला महंत घांपो अध्यक्ष और
गोपाल कृष्ण महंत उपाध्यक्ष बनकर नगर परिषद के कार्यालय से बाहर आए तो
कांग्रेसियों ने ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ फूलमालाएं देकर उनका गर्मजोशी
के साथ स्वागत किया।