कुल्लू दशहरा में कजाकिस्तान के कलाकार।-संवाद
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में लालचंद प्रार्थी कलाकेंद्र में आयोजित तीन दिवसीय लोकनृत्य प्रतियोगिता में प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिली। प्रतियोगिता में 77 सांस्कृतिक दलों ने भाग लेकर पारंपरिक लोकनृत्यों के माध्यम से हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत किया। इसमें 69 महिला मंडलों और आठ अन्य सांस्कृतिक दलों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। प्रतियोगिता में विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों और आकर्षक नृत्य शैलियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
दशहरा उत्सव में सोमवार को लोकनृत्य प्रतियोगिता में पांच सांस्कृतिक दलों ने भाग लिया। इनमें शिवा सांस्कृतिक दल सरली, सूत्रधार कला संगम कुल्लू, सरस्वती सांस्कृतिक कला संगम बड़ाग्रां, भुट्टी वीवर्ज भुट्टी कॉलोनी और युवा कला संगम गाहर के प्रतिभागियों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं। जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया ने बताया कि तीन दिनों तक चली लोकनृत्य प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल के फैसले के आधार पर भुट्टी वीवर्ज भुट्टी कॉलोनी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
सूत्रधार कला संगम कुल्लू दूसरे और युवा कला संगम गाहर तीसरे स्थान पर रहा। प्रतियोगिता में शामिल सभी सांस्कृतिक दलों ने अपनी प्रस्तुतियों से लोक कला के प्रति समर्पण और प्रतिभा का परिचय दिया। लोकनृत्य प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को मंगलवार को मुख्यमंत्री की ओर से पुरस्कृत किया जाएगा। कुल्लू दशहरा उत्सव में आयोजित इस तरह की प्रतियोगिताएं स्थानीय लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं को मंच प्रदान करने के साथ ही कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देती हैं। 77 सांस्कृतिक दलों की भागीदारी ने प्रतियोगिता को विशेष बना दिया।