आस्था... सदियों से आदेशों का पालन कर रहे लगघाटी के ग्रामीण
माता की 110 बीघा भूमि पर होता है परंपरागत फसलों का उत्पादन
माता के कारज में अन्न करते हैं भेंट, आदेश पर ही बीजते और काटते हैं फसल
खुशहाल सिंह राठौर
भल्यानी (कुल्लू)। लगघाटी के भायल रोपा में रासायनिक खेती पर पूर्ण प्रतिबंध हैं। आज तक इस भूमि पर रासायनिक खादों का उपयोग नहीं हुआ है।
आज सरकार लोगों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन लगघाटी के दोघरी गांव के रौंगापौटा के भायल रोपा में कभी भी रासायनिक खादों का उपयोग नहीं हुआ है। घाटी की आराध्य माता के आदेश के चलते इस भू-खंड पर रासायनिक खेती करने की सख्त मनाही है। यहां रासायनिक खेती पर पूर्ण प्रतिबंध है। माता के इस आदेश का क्षेत्र के लोग सदियों से पालन करते आ रहे हैं। लोग माता के कोप के डर से आज तक रासायनिक खेती करने का दुस्साहस नहीं कर पाए हैं। माता की 110 बीघा की इस भूमि पर लोग परंपरागत फसलों का उत्पादन करते आए हैं। इसकी एवज में लोग माता के कारज में अन्न भेंट करते हैं।
लोग यहां धान की रोपाई करते हैं इसके अतिरिक्त गेहूं, जौ, कोदा, सलियारा, काउणी तथा मक्की आदि फसलों का उत्पादन करते आ रहे हैं। अब लोग इस भूमि पर नगदी फसलों का भी उत्पादन कर रहे हैं। फसल कब लगाएं, कटाई कब करें, यह सब माता के आदेश पर निर्धारित होता है। दोघरी पंचायत के पूर्व प्रधान शरवन ठाकुर कहते हैं कि यह माता की जमीन है इस पर आज तक रासायनिक खेती नहीं हुई है। उनके लिए माता के आदेश सर्वेसर्वा हैं। देव आदेश को पत्थर की लकीर माना जाता है। यहां के लोग देव आस्था के प्रति समर्पित है।
माता फुंगनी के कारदार राम लाल ठाकुर कहते हैं कि लोग यहां जैविक खेती करते आये हैं और इस भूमि पर फसलों का भी खूब उत्पादन होता है।