कुल्लू के लगघाटी स्थित भुट्ठी गांव में लहसुन की पैकिंग करते किसान।
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कुल्लू/खराहल। जिले में लहसुन की फसल तैयार हो गई है। किसान अपने उत्पाद को मंडियों में बेचने के लिए पहुंचा रहे हैं। पिछले साल की अपेक्षा लहसुन आधे दाम में बिकने से किसान मुश्किल में है।
शुरूआती दौर में किसानों को लहसुन के दाम 50 रुपये प्रति किलो ही मिले हैं। अब 70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से ए श्रेणी का लहसुन मंडियों में बिक रहा है। कम कीमत मिलने से किसानों को आर्थिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ा है। आढ़ती और व्यापारियों का कहना है कि कोविड-19 के चलते यह समस्या पेश आ रही है। सूबे में 4000 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की खेती हो रही है। जिला कुल्लू में करीब 1500 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की पैदावार हो रही है। प्रदेश में सबसे ज्यादा लहसुन सिरमौर जिले में होता है। इसके बाद दूसरा स्थान कुल्लू का है। कुल्लू के अमित, ज्ञान ठाकुर, अनूप भंडारी, सुशील, जय चंद ठाकुर, रितेश ठाकुर, मुनीष भंडारी, संजीव ने कहा कि इस साल लहसुन का मूल्य आशा के अनुरूप नहीं मिल रहा है। इसकी खेती करते समय भी अधिक खर्चा वहन करना पड़ता है। किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज नेगी ने कहा कि इस वर्ष कम कीमत मिलने से किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। किसानों का खेती पर किया खर्चा भी पूरा नहीं हो रहा है।
उचित दाम मुहैया करवाने को सरकार प्रयासरत
एपीएमसी के सचिव सुशील गुलेरिया ने कहा कि लहसुन मंडियों में 70 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। कोविड-19 के चलते दामों पर प्रभाव पड़ा है। सरकार की ओर से पूरा प्रयास किया जा रहा है कि किसानों को उनके उत्पाद का उचित दाम मिल सके।