हिडिंबा माता मनाली दशहरा उत्सव में विराजमान। संवाद
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में माता हिडिंबा की अहम भूमिका रहती है। उत्सव के आगाज से लेकर अंत तक निभाई जाने वाली देव परंपराओं में माता का विशेष स्थान है।
उत्सव के आगाज की बात करें तो तब तक भगवान रघुनाथ अपने देवालय से उत्सव के लिए रवाना नहीं होते जब तक माता राज महल में विराजमान नहीं होतीं। उत्सव के बीच निभाई जाने वाली देव परंपराओं में जलेब और मोहल्ला में भी अहम भूमिका होती है। उत्सव के दूसरे दिन से शुरू होने वाली नरसिंह की जलेब तब तक हिडिंबा के शिविर से आगे नहीं बढ़ती जब तक राजा माता के अस्थायी शिविर में माथा नहीं टेक लेते।
मोहल्ला भी तब तक शुरू नहीं होता जब तक माता रघुनाथ के अस्थायी शिविर और चानणी में हाजिरी नहीं लगातीं। सबसे पहले माता की हाजिरी लगती है, उसके बाद तमाम घाटियों से पहुंचे देवी-देवता हाजिरी लगाते हैं। माता के गूर देवी सिंह का कहना है कि उत्सव का आगाज करने से पहले रघुनाथपुर से छड़ी माता को लेने के लिए रामशिला आती है। उसके बाद माता आगे बढ़ती हैं। संवाद