भव्य मिलन के लिए दशहरा मैदान पहुंचे निरमंड के कुई कंडा नाग देवता
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में रविवार को उस समय भक्त और देव दोनों की धड़कनें तेज हो उठीं, जब 365 वर्षों बाद देवता कुई कंडा नाग तांदी और कुई कंडा नाग घाटू का भव्य मिलन हुआ।
राजा कर चाननी के पावन स्थल पर देवताओं के मिलन ने श्रद्धालुओं के दिलों में आनंद और आस्था का सागर भर दिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, शहनाई की मधुर तान और करनाल की झंकार के बीच, सैकड़ों श्रद्धालुओं ने इस दिव्य संगम का हिस्सा बनकर सुख-शांति की प्रार्थना की। इस अनूठे मिलन ने न केवल देवताओं के हरियानों और देवलुओं को एक सूत्र में बांधा, बल्कि कुल्लू दशहरे की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी नया जीवन दिया।
दोपहर करीब 3:00 बजे देवता कुईकंडा नाग घाटू कलाकेंद्र के पीछे अपने अस्थायी शिविर से रवाना हुए और राजा कर चाननी के पास भव्य देव मिलन हुआ। इसके साक्षी सैकड़ों लोग बने। इस दौरान लोगों ने दोनों देवता के दर्शन किए और सुख, शांति का आशीर्वाद लिया। देवताओं के मिलन से दोनों देवताओं के हारियानों और देवलुओं ने खुशी जताई।
कुई कंडा नाग घाटू के कारदार नीरत सिंह ने कहा कि दोनों नाग देवता का मिलन हुआ है। उन्होंने कहा कि देवता के हारियानों और देवलुओं ने निर्णय लिया कि देवता कुई कंडा नाग तांदी और देवता कुई कंडा नाग घाटू का मिलन हो। इसी देव परंपरा को निभाया गया।