खराहल (कुल्लू)। पतझड़ के बाद पौधों के तनों में चूना लगाना जरूरी है। ऐसे में तने को धूप से बचाया जा सकता है। माहिरों का कहना है कि तेज धूप में नीली किरणों का प्रभाव ज्यादा होने से सनबर्न की संभावना अधिक होती है और तने की खाल जलने से कैंकर रोग भी पनपता है।
यह प्रकोप उन बगीचों में ज्यादा होता है, जहां शाम के समय धूप अधिक पड़ती है। पतझड़ के बाद धूप का सबसे ज्यादा प्रकोप तने पर पड़ता है। बोर्डो पेस्ट सफेद रंग का है। धूप नीली किरणों के प्रभाव को तने पर पड़ने से रोक देता है। उद्यान विभाग के विकास अधिकारी उत्तम पराशर का कहना है कि दस लीटर बोर्डो पेंट बनाने के लिए तीन लीटर चूना और एक किलो नीला थोथा नौ लीटर पानी में मिलाए। प्रत्येक पौधे की तने से लेकर टहनी निकलने वाले भाग तक की चूने-नीले थोथे के घोल से पुताई करना लाजिमी है।
बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. रोशन लाल का कहना है कि पतझड़ के बाद फ ल पौधो को सनबर्न और कैंकर जैसी बीमारियों से बचाना बहुत जरूरी है। इन रोगों के निदान के लिए पौधों पर बोर्डो पेंट लगाने कार्य समय पर करना चाहिए।