शिक्षकों, गैर शिक्षकों वर्ग और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर की व्यवस्था
कांगड़ा के चनौर स्कूल में मिड-डे मील वर्कर की हत्या के बाद की सख्ती
स्कूलों में प्रभारियों को पुख्ता करने होंगे सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
राजीव नैय्यर
कुल्लू। जिले के सातों शिक्षा खंडों में 1004 प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें प्रवेश से पहले किसी भी व्यक्ति को विशेष अनुमति लेनी होगी।
यह व्यवस्था शिक्षक, गैर-शिक्षक वर्ग और अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर की गई है। विद्यालय में किसी भी तरह का कार्य होने पर व्यक्ति को प्रभारी से मिलना होगा। परिसर में घूमने की अनुमति उसे नहीं दी जाएगी।
हालांकि, जिले के शिक्षा खंड कुल्लू-एक, कुल्लू-दो, बंजार, सैंज, आनी, निरमंड और नग्गर के तहत आने वाले अधिकतर विद्यालयों में चहारदीवारी स्थापित हैं। गत बरसात में कुछ विद्यालयों की चार दीवारी को नुकसान पहुंचा है। उन विद्यालयों में नुकसान का आकलन कर दोबारा चहारदीवारी लगाई जाएगी। जिले के सभी विद्यालयों में यह व्यवस्था पहले से ही लागू है लेकिन 12 फरवरी को प्रदेश के जिला कांगड़ा के देहरा उपमंडल की पंचायत चनौर की राजकीय प्राथमिक विद्यालय में घुसकर महिला मिड-डे मील वर्कर की हत्या के मामले के बाद दोबारा आदेशों को सख्ती से लागू करने के उच्च और प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक ने विद्यालय प्रभारियों को निर्देश किए हैं। बिना अनुमति विद्यालय में किसी भी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा विद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के भी प्रभारियों को पुख्ता इंतजाम करने होंगे।
उधर, गुणवत्ता एवं प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक डॉ. सुनील दत्त ठाकुर और उच्च शिक्षा उपनिदेशक देश राज डोगरा ने कहा कि प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों तक शिक्षक, गैर-शिक्षक वर्ग और अध्ययनरत विद्यार्थियों की सुरक्षा के इंतजाम है। विद्यालयों में सुरक्षा दीवारों की व्यवस्था है और बिना अनुमति विद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके लिए बाकायदा विद्यालय के मुख्याध्यापक, प्रधानाचार्य और कार्यकारी प्रभारी को निर्देश दिए गए हैं।
चतुर्थ श्रेणी कर्मी नहीं तो शिक्षक करेंगे निगरानी
विद्यालय में बाहरी लोगों के प्रवेश पर कड़ी नजर रहेगी। इसके लिए मुख्याध्यापकों और प्रधानाचार्यों को व्यवस्था करने के निर्देश शिक्षा उपनिदेशक की ओर से जारी किए गए हैं। विद्यालय में अगर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं है तो शिक्षक इसकी निगरानी करेंगे। विद्यार्थियों और विद्यालय के शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ की सुरक्षा के प्रति कोताही नहीं बरती जाएगी।