अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिले में तीन दिनों की बर्फबारी के बाद शनिवार को मौसम खुल गया है। लेकिन कुल्लू और लाहौल में हुई भारी बर्फबारी के बाद अब हिमखंड गिरने का खतरा बन गया है। हिमखंडों के गिरने का सबसे ज्यादा खतरा लाहौल में है, जहां मौसम खुलने पर पहाड़ों से हिमस्खलन शुरू हो जाता है। ऐसे में कुल्लू और लाहौल प्रशासन ने पर्यटकों व लोगों को अलर्ट किया है।
कुल्लू जिला में जनजीवन पटरी पर लौटने में समय लगेगा। घाटी में दो दर्जन सड़कों के बंद होने से करीब 150 गांव को संपर्क कटा हुआ है। लोनिवि ने बंद सड़कों को खोलने का काम शुरू कर दिया है। पहाड़ों में हुई तीन से पांच फुट बर्फबारी से पेयजल की लगभग 200 स्कीमें प्रभावित चल रही हैं। लोगों को दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। कई इलाकों में तो पेयजल के स्रोत ठोस बर्फ की तरह जाम हो गए हैं। ऐसे में ग्रामीण कड़ाके की ठंड में बर्फ वाले रास्तों में जान जोखिम में डालकर नदी-नाले से पानी ढो रहे हैं। कुछ गांवों में बर्फ से ही गुजारा किया जा रहा है। उधर ,कुल्लू के साथ जनजातीय क्षेत्र लाहौल में हिमखंड गिरने को लेकर स्थानीय प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। लाहौल के कई जगहों में पहाड़ियों से शनिवार को भी बर्फ के गोले गिरते रहे। लेकिन किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। कुल्लू जिला प्रशासन ने हिमखंड गिरने की संभावना से पर्यटकों व आम लोगों को संवेदनशील इलाकों की ओर न जाने की चेतावनी दी है। लाहौल प्रशासन ने लोगों को दूर न जाने की हिदायत की है। उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने कहा कि बर्फबारी से बंद हुई सड़कों और पानी की स्कीमों को जल्द रिस्टोर करने के आदेश दिए हैं।