अमर उजाला ब्यूरो
पतलीकूहल/कुल्लू। देवभूमि कुल्लू में अब सेब के साथ जड़ी-बूटियां भी कैश क्रॉप के तौर पर उगाई जाएंगी। बताया जा रहा है कि जिले में उगने वाली कड़ू, मजीट, चिरेता, पतीश, हाथपंजा, वन ककड़ी और रत्नजोत समेत कई प्रजातियां लुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
अब सरकार ने लुप्त होने वाली जड़ी-बूटियों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए प्रयास करने शुरू कर दिए हैं। इसके लिए एक प्रोजेक्ट बनाया गया है। चार साल में इसके परिणाम दिखने शुरू हो जाएंगे। इस प्रोजेक्ट का जिम्मा जीबी पंत हिमालयन पर्यावरण अनुसंधान केंद्र को सौंपा गया है। इसके तहत सबसे पहले उक्त प्रजातियों की संख्या का आकलन किया जाएगा। फिर इनके बीज एकत्रित कर किसानों को बांटे जाएंगे। बाद में लुप्त प्रजाति के बीज सिराज घाटी के सैंज, बंजार, ऊझी घाटी के सोलंग गांव और जाणा समेत कई स्थानों पर रोपे जाएंगे। सरकार की मुहिम और कृषीकरण से लुप्त हो रही जड़ी-बूटियां बच पाएंगी। गौर रहे कि जड़ी-बूटियों के अवैज्ञानिक दोहन से वर्तमान में इनका अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। पर्यावरण प्रेमी भी इस बात को लेकर चिंतित हैं। खास बात यह है कि इसमें स्थानीय इच्छुक किसानों को भी जोड़ा जाएगा।
औद्योगिक इंडस्ट्री से जुड़ेंगे किसान : एसएस
हिमालयन पर्यावरण अनुसंधान संस्थान माहौल के वैज्ञानिक एसएस सामंत ने बताया कि किसानों को जड़ी-बूटियां उगाने के बाद मार्केटिंग में भी सहायता दी जाएगी। किसानों को जड़ी-बूटियों से दवाइयों बनाने वाली औद्योगिक इंडस्ट्री से भी जोड़ा जाएगा। कुल्लू के विभिन्न स्थानों में बूटियों की खेती होगी। इससे लुप्त हो रही जड़ी बूटियों के सरंक्षण में मदद मिलेगी।