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महाआरती सफल, आयोजन स्थल पर उठे सवाल

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कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कुल्लू। जिला प्रशासन ने ब्यास नदी के किनारे मौहल स्थित नेचर पार्क में सैकड़ों दीये जलाकर ब्यास महाआरती के माध्यम से पर्यावरण बचाने का संदेश दिया हो। लेकिन डंपिंग साइट में कूड़े की बदबू को प्रशासन भूल गया। ब्यास महाआरती के दौरान कूड़े की बदबू ने लोगों को इस कद्र परेशान किया कि उनको मुंह ढक कर बैठना पड़ा।
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ऐसे में प्रशासन के आयोजन स्थल को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर डंपिंग साइट से महज 100 मीटर दूर ही जगह को आरती के लिए क्यों चुना गया। ब्यास व पार्वती संगम जिया सहित कई अन्य जगह भी थी, जहां पर यह कार्यक्रम बखूबी हो सकता था। लेकिन कूड़े-कचरे के ढेरों के पास यह आयोजन होने से लोगों को जरूर परेशानियों का सामना करना पड़ा है। गौर रहे कि डंपिंग साइट की बदबू से स्थानीय लोग पहले ही परेशान हैं। बदबू की वजह से यहां के स्थानीय लोगों की शिकायत पर एनजीटी ने यहां नगर परिषद कुल्लू, नगर पंचायत भुंतर को कूड़ा डंप करने से मना कर कोई अन्य जगह डंपिंग साइट तलाशने के लिए कहा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट से नप ने समय मांग फिर से यहां कूड़ा डंप किया। मंगलवार को जब यहां लोग महाआरती के आए तो यहां लोगों को डंपिंग साइट से आ रही बदबू का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि कुछ लोग बदबू के चलते महाआरती समाप्त होने से पहले ही चले गए, जबकि महिलाओं ने मुंह ढक लिए। महाआरती में शामिल होने आए प्रदीप, राकेश, सुमन शर्मा, रोजी, रेखा देवी, विमला ठाकुर, पौड़ी देवी, रक्षा ठाकुर, पार्वती देवी, नविता और अनुरंजनी ने कहा कि शाम के समय डंपिंग साइट की ओर से इतनी तेज दुर्गंध आ रही थी कि बैठना मुश्किल हो गया था। महाआरती के आयोजन स्थल को बदला भी जा सकता था। इसे कचरे के ढेेरों करने की बजाय दूसरी जगह पर भी किया जा सकता था। दुर्गंध के कारण कार्यक्रम में परेशानी हुई।
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