अमर उजाला ब्यूरो
गुशैणी (कुल्लू)। उपमंडल बंजार के बगीचों में सेब पौधों पर बोरर कीट ने हमला बोल दिया है। बोरर कीट का असर बगीचों में साफ देखा जा सकता है। बोरर कीट की चपेट में आने से कई सेब के पेड़, पौधे सूख रहे हैं। इससे बागवानों को हर वर्ष नुकसान उठाना पड़ रहा है। बोरर कीट से बगीचों को हो रहे नुकसान को लेकर घाटी के बागवान काफी चिंतित हैं।
बोरर कीट सेब पौधे में मिट्टी के पास लगे तने में अंदर जाता है। इसके बाद यह पेड़ को अंदर से खाना शुरू कर देता है। कुछ ही समय में यह कीट पेड़ को खोखला कर देता है। इसके बाद यह पौधा सूख जाता है। घाटी के बागवान उदय शर्मा, संजय, दलीप ठाकुर, कुंज लाल, रमेश, कमल कांत, नवीन शर्मा, बुद्धि प्रकाश और अजय राणा ने कहा कि बोरर कीट के हमले से कई पेड़ सूख चुके हैं। सेब के पेड़ों में लग रही बीमारी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि सेब के पौधे को तैयार करने में 10 से 15 वर्ष का समय लग जाता है। लेकिन कीट के हमले से बागवान परेशान हैं। विभाग को चाहिए कि वह ग्रामीण स्तर पर बागवानों को बोरर कीट के प्रति जागरूक करें। इसकी रोकथाम के लिए दवाइयों व विधि का सही तरीका बताए, जिससे बागवानों बोरर कीट से होने वाले नुकसान से बच सके।
पीटीसी दवा को घोलकर रूई के साथ डालें : ज्ञान चंद
बागवानी विभाग के सहायक उद्यान विकास अधिकारी ज्ञान चंद वर्मा ने कहा कि इसके उपचार के लिए पीटीसी दवा को घोलकर रूई के साथ बोरर किए स्थान पर डालें। छेद किए स्थान पर लाल मिट्टी से लेप करें। इससे बोरर कीट अंदर ही मर जाएगा। इस बीमारी का उपचार आसानी से किया जा सकता है।