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पांच इलेक्ट्रिक बसें नहीं चल सकीं

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कुल्लू। निजी बसों की हड़ताल से एचआरटीसी पर्यटकों व आम लोगों को बेहतर यातायात सुविधा नहीं दे सका है। सबसे व्यस्त रूट कुल्लू-मनाली व कुल्लू-भुंतर-औट के बीच भी लोगों को घंटों तक बस के लिए चौक व बस स्टॉप पर इंतजार करना पड़ा। कई लोग अपने जरूरी कामकाज निपटाने के लिए समय पर भी नहीं पहुंच पाए।
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एचआरटीसी कुल्लू के पास 25 इलेक्ट्रिक बसें है। निजी बस हड़ताल के पहले दिन 14 इलेक्ट्रिक बसें खड़ी रहीं, जबकि दूसरे दिन पांच बसों को निगम नहीं चला सका है। स्टाफ की कमी के कारण ऐसा हो रहा है। हालांकि सूबे के कई जगह निजी बस ऑपरेटरों ने अपनी हड़ताल को वापस ले लिया है। परिवहन मंत्री के गृह जिला में दूसरे दिन भी पौने दौ सौ निजी बसों के न चलने से शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों की जनता खूब परेशान हुई। निजी बस ऑपरेटरों की ओर से कुल्लू-भुंतर के बीच 36 मिनी बसों का संचालन किया जाता है और सुबह आठ बजे से लेकर रात आठ बजे तक 150 चक्कर लगाती हैं। मंगलवार को एचआरटीसी ने कुल्लू भुंतर के बीच मात्र 30 चक्कर ही लगाए हैं। कुल्लू-मनाली के बीच 40 चक्कर के मुकाबले मात्र 14 चक्कर लगाए हैं। सवारियों को सबसे अधिक परेशानी भी इन्हीं दो रूटों पर अधिक रही है। निगम की 76 बसें मनाली से भुंतर के बीच ही सेवा देती हैं। लोगों का कहना है कि अगर निगम खड़ी रही बसों का भी संचालन करती है तो लोगों को कुछ और राहत मिलती है। निजी बस ऑपरेटर संघ के अध्यक्ष रजत जंबाल तथा सदस्य चंदन करीर ने कहा कि एचआरटीसी लोगों को यातायात की सुविधा देने में नाकाम रहा है। उन्होंने कहा कि निगम ने ओवरलोडिंग कर सवारियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया है। उधर, आरएम कुल्लू डीके नारंग ने कहा कि स्टाफ के अभाव से इलेक्ट्रिक बसों का संचालन नहीं हो पाया है। बावजूद निगम ने लोगों की सुविधा के लिए 55 अतिरिक्त चक्कर लगाए हैं।
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