रोहतांग बहाली में लगेगा एक सप्ताह
लाहौल की तरफ से मिशन स्नो क्लीयरेंस कंपलीट
दक्षिणी छोर में रफ्तार नहीं पकड़ पाया अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। रोहतांग बहाली को लेकर अभी कुछ और समय लग सकता है। रोहतांग के उत्तरी हिस्से में अधिक बर्फ के बावजूद 70 आरसीसी ने अपनी सीमा से बर्फ हटाने का काम पूरा कर लिया है। वहीं दक्षिणी छोर से बर्फ हटाने में संगठन के पसीने छूट गए हैं।
संगठन दावा है कि रोहतांग बहाली को लेकर वह दिन-रात लगातार प्रयास कर रहा है। अधिकारियों की मानें तो रोहतांग खुलने में अभी भी एक सप्ताह का समय लग सकता है। पैदल राहगीरों का कहना है कि मनाली की तरफ से महज एक डोजर को मिशन स्नो क्लीयरेंस में तैनात किया गया है। एक सप्ताह पहले उम्मीद की जा रही थी कि 1 अप्रैल तक दर्रा बहाल हो जाएगा। एचआरटीसी केलांग डिपो के रिकॉर्ड से मिली जानकारी के मुताबिक साल में भारी बर्फबारी के बावजूद 10 अप्रैल को रोहतांग बहाल किया गया लेकिन इस बार जनवरी महीने तक रोहतांग में जमकर बर्फबारी नहीं हुई। जब तक बीआरओ दर्रे को बहाल नहीं करता जनजातीय लोगों को तब तक गुलाबा बैरियर में राहत नहीं मिलेगी। रोहतांग बहाली मिशन का कार्य मनाली की तरफ से गुलाबा और लाहौल की तरफ स्तिंगरी से शुरू होता है। इस बार लाहौल की तरफ से बीआरओ की टीम रोहतांग टॉप पहुंच चुकी है। जबकि मनाली की तरफ अभी भी करीब एक किलोमीटर दायरे से बर्फ हटाना शेष रह गया है। जिसे करीब एक सप्ताह के समय में हटाने का दावा किया जा रहा है। यात्रियों में सुरेश, दोरजे, टशी, किशन, शाम ने बताया कि मनाली की तरफ केवल एक ही डोजर बर्फ हटाने में जुटा है। यहां मशीनरी बढ़ानी चाहिए जिससे लाहौल घाटी को जल्द जोड़ा जा सके। इधर, सीमा सड़क संगठन के 38 बीआरटीएफ कमांडर कर्नल एके अवस्थी ने बताया कि बर्फ हटाने के लिए संगठन के जवान दिन-रात प्रयास कर रहे हैं। एक सप्ताह के भीतर रोहतांग को ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा।