अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। सितंबर माह में ब्यास नदी में आई भारी बाढ़ से भुुंतर स्थित ब्यास-पार्वती संगम स्थल पूरी तरह से तहस नहस हो गया है। ऐसे में ब्यास महाआरती का पहला आयोजन मौहल स्थित नेचर पार्क में किया जा रहा है।
घाटी में पर्यटन, शांति व पर्यावरण संरक्षण को लेकर ब्यास महाआरती का आयोजन हर साल होगा। इसके लिए ब्यास-पार्वती संगम स्थल पर ब्यास आरती के लिए घाटों का भी निर्माण किया जाएगा। लेकिन 2018 के आगमन पर हो रही ब्यास महाआरती को लेकर जिला प्रशासन पूरी तैयारियां में जुट गया है। नेचर पार्क मौहल में रविवार को आरती स्थल को मशीनरी से समतल किया गया। ब्यास आरती का भव्य आयोजन 200 मीटर लंबा तथा लगभग 50 मीटर चौड़ी जगह पर होगा। यहां हजारों लोग इस धार्मिक अनुष्ठान को देख सकेंगे। जिला प्रशासन की ओर से देवी-देवता पुजारी संघ, कारदार संघ, बजंतरी संघ, जिला के अन्य संगठनों और विभिन्न विभागों की मदद से आयोजन कर रहा है। इस मौके पर वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर भी शामिल होंगे। हालांकि जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को भी आमंत्रित किया है। एक जनवरी को संध्याकाल में करीब पांच बजे होने वाली महाआरती में 121 पंडित, 200 से अधिक बजंतरी, कुल्लू घाटी के देवी-देवताओं के कारदार समेत घाटी के हजारों लोग भाग लेंगे। उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने कहा कि ब्यास महाआरती हर साल होगी। अगली बार इसका आयोजन ब्यास-पार्वती नदी के संगम स्थल जिया भुंतर में किया जाएगा। इस साल भी ब्यास आरती को उसी जगह पर किया जाना था। लेकिन ब्यास में आई बाढ़ से आयोजन स्थल पूरी तरह से बह गया है।
आटे, मिट्टी के दीये-पत्तों के डोने से होगी आरती
कुल्लू। ब्यास महाआरती में आटे के दिए अलावा मिट्टी या फिर पत्ते के डोने इस्तेमाल किए जाएंगे। इच्छुक श्रद्धालु अपने स्तर भी आटे या मिट्टी के दीये और डोने लेकर आ सकते हैं। आरती में किसी तरह की समस्या न हो इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे। सहायक आयुक्त सन्नी शर्मा ने कहा कि लोगों के लिए परिवहन की सुविधा उपलब्ध होगी। कुछ रूटों पर अतिरिक्त बसों को चलाया जाएगा।