अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। नगर परिषद कुल्लू के पास कूड़े को डंप करने के लिए कोई डंपिंग साइट नहीं है। लेकिन शहर में कूड़े को निष्पादित करने का नप और लोगों ने नया तरीका ढूंढ निकाला है। शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेरों को आग के हवाले किया जा रहा है। पीपल जातर के बाद शहर में यही क्रम दोहराया जा रहा है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कूड़े के ढेर में आग लगाकर कौन अपनी जान छुड़वाना चाह रहा है। कूड़े को शहर के बीचोंबीच जलाए जाने से न केवल शहरवासियों की सेहत पर इसका असर पड़ रहा है, बल्कि एनजीटी के नियमों की भी धज्जियां सरेआम उड़ रही है। एनजीटी व पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर कूड़े के ढेरों में आग लगाई जा रही है। तीन दिन पहले ही सरवरी में कूड़े में आग लगाई तो साथ लगते शौचालय को खतरा हो गया। रात को दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाकर तीन लाख की संपत्ति जलने से बचाई। सरवरी पार्क में रविवार रात को भी कूड़ा अंधेरे में जलता रहा। कूड़े के जलने से देवदार के हरे भरे पेड़ भी झुलस गए। शहर के अन्य वार्डों में कूड़े के ढेरों को जलाया जाना अब आम हो गया है। सीधे तौर पर यह कहें तो नगर परिषद ने कुल्लू शहर में कूड़े की समस्या के आगे हाथ खड़े कर दिए हैं। नगर परिषद कुल्लू की ओर से आईमा पंचायत की तर्ज पर बनने वाला कूड़ा संयंत्र अभी शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में लोगों को कब कूड़े की समस्या से निजात मिलेगी, फिलहाल यह कहना मुश्किल है। दूसरी ओर नगर परिषद के अधिकारी भी कूड़े की समस्या को लेकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि प्रशासन की ओर से कूड़ा जलाने वालों पर एक लाख जुर्माना रखा गया है।