कुल्लू। भुंतर के वैली ब्रिज में लग रहा जाम किसान-बागवानों और सैलानियों के लिए आफत बन गया है। यहां आए दिन लग रहे जाम से कृषक अपने उत्पादों को समय पर सब्जी मंडियों में नहीं पहुंचा पा रहे हैं। कई दफा तो किसान-बागवान सब्जी मंडियों में लगने वाली बोली में भी भाग नहीं ले पा रहे हैं और ऐसे में उन्हें अपने उत्पाद का मंडियों में उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। इन दिनों घाटी में प्लम, प्लम और फूलगोभी का सीजन जोरों पर चला है। वहीं कुछ इलाकों में नाशपाती का भी तुड़ान शुरू हो गया है।
भुंतर के तंग वैली ब्रिज से लग रहे जाम से इलाके के लोगों में नेशनल हाईवे तथा सरकार के खिलाफ भारी रोष है। जाम में फंसने से चिलचिलाती धूप सबके पसीने निकाल रही है। लंबे जाम से जहां स्थानीय दुकानदारों का धंधा भी चौपट हो रहा है। वहीं मणिकर्ण गड़सा, पारला भुंतर व दियार इलाके के किसान-बागवानों को भारी परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है। जाम से किसान-बागवानों को आर्थिक नुकसान झेलने को विवश हैं। वैली ब्रिज पर वाहनों की आवाजाही अधिक होने से यहां से गुजरने वाला हर शख्स परेशान है।
इस संबंध में स्थानीय निवासी रूचिन चौहान, मेघ सिंह कश्यप, वीरी सिंह, गोपी चंद, इब्राहिम, किसान अमर ठाकुर, अजय राणा, संजू पंडित तथा ओम प्रकाश के अनुसार वन-वे वैली ब्रिज किसान-बागवानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इस समस्या को दूर करने की जिम्मेदारी एनएच अथॉरिटी और प्रदेश सरकार की है। उधर, हिल ऑटो यूनियन भुंतर भी पुल के कारण लगने वाले जाम से काफी परेशानी हैं। किसान-बागवानों से साथ-साथ कुल्लू की वादियों में सैर सपाटे के लिए पहुंच रहे पर्यटकों को भी परेशान होना पड़ रहा है। बजौरा से मनाली के दो घंटे सफर में पर्यटकों को पांच से छह घंटे तक का समय लग रहा है।
वहीं इस संबंध में एनएच-21 के अधिशाषी अभियंता रोजिफ शैख के अनुसार भुंतर वैली ब्रिज की जगह 1.25 करोड़ की लागत से नया पुल तैयार किया जा रहा है। अभी ब्यास नदी का जलस्तर अधिक होने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। टेंडर हो चुके हैं ऐसे में अक्तूबर व नवंबर माह में नया पुल का काम आरंभ किया जाएगा।