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विद्यार्थियों के लिए 12वीं की परीक्षा अहम

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कुल्लू। सीबीएसई ने 12वीं कक्षा के मूल्यांकन का फार्मूला तय कर दिया है। इसके तहत 31 जुलाई तक विद्यार्थियों के समक्ष नतीजे आ जाएंगे। कुल्लू के अधिकतर विद्यार्थियों ने भी कोरोना काल में सीबीएसई के इस फार्मूले पर सहमति जताई है। लेकिन कुछ विद्यार्थियों में अंकों को लेकर अभी भी संशय है।
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विद्यार्थियों का कहना है कि 10वीं, 11वीं और 12वीं के यूनिट टेस्ट को आधार बनाना सही है। लेकिन विद्यार्थियों के जीवन को 12वीं कक्षा की परीक्षा ही आधार प्रदान करती है। इसके चलते विद्यार्थियों ने अच्छे अंकों से यह परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए कड़ी मेहनत की है। साथ ही इस परीक्षा में अच्छे अंक आना जरूरी है। आदिल खान, राघव, सुभाष, सुमन, रितिका, श्रेया ने कहा कि सरकार और बोर्ड ने जो निर्णय लिया है, वह विद्यार्थियों के लिए सही है। परीक्षा होने से विद्यार्थियों की अंकों को लेकर दुविधा हो जाती है।
30:30:40 प्रतिशत का फार्मूला सही
सुहानी ने कहा कि 30:30:40 प्रतिशत का फार्मूला सही है। अंक देने के लिए पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड ध्यान में रखा जा रहा है, जो विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए सही निर्णय है। कोरोना काल में परीक्षा करवाना जोखिम भरा हो सकता था। ऐसे में सीबीएसई के इस फार्मूले से विद्यार्थियों को राहत मिलेगी।
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तीन साल का रिकॉर्ड जांचना उचित
उद्धभव ने कहा कि विद्यार्थियों के तीन वर्षों का रिकॉर्ड जांचना उचित है। इससे विद्यार्थी को भी मालूम होगा कि उसने विगत वर्षों में परीक्षा में बेहतर परिणाम पाया या नहीं। विद्यार्थियों के पिछले परीक्षा परिणामों को आधार बनाकर सीबीएसई ने उचित किया है। इससे लाखों विद्यार्थियों का भविष्य तय हो पाएगा।
बेहतर अंक पाने की कोशिशें बेनतीजा
आकृति ने कहा कि वर्षभर की गई मेहनत का परिणाम नहीं मिल पाएगा। 12वीं की परीक्षा विद्यार्थी के जीवन का आधार होती है। लेकिन कोरोना महामारी के कारण परीक्षा न होने से बेहतर अंक पाने के लिए की गई सारी कोशिशें बेनतीजा रहेंगी। फार्मूले के आधार से किस प्रकार के अंक मिलेंगे, इसे लेकर असमंजस बना हुआ है।
यूनिट टेस्ट, प्री बोर्ड को आधार बनाना गलत
आकांक्षा ने कहा कि यूनिट टेस्ट और प्री बोर्ड को आधार बनाना गलत है। नेटवर्क समस्या के कारण कई विद्यार्थी ऑनलाइन कक्षाएं नहीं लगा पाए हैं। विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा के इंतजार में थे। अधिकतर विद्यार्थी परीक्षा के दौरान बेहतर अंक पाने के लिए अधिक मेहनत करते हैं। लेकिन परीक्षा न होने से ऐसे लाखों बच्चों की परेशानी बढ़ेगी।
कोरोना काल में थी ऐसे फार्मूले की जरूरत
मुस्कान ने कहा कि कोरोना काल में परीक्षा रद्द करना विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए सही है। लेकिन बिना परीक्षा के विद्यार्थियों को उचित अंक देने के लिए ऐसे ही किसी फार्मूले के जरूरत थी। यूनिट टेस्ट और प्री बोर्ड को आधार बनाकर सीबीएसई ने विद्यार्थियों की परेशानी को काफी हद तक कम कर दिया है।
परीक्षा होती तो अच्छे अंक लेते विद्यार्थी
स्नेहा ने कहा कि सीबीएसई का विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए निर्णय और फार्मूला सही है। लेकिन परीक्षा होती तो विद्यार्थी अपनी कड़ी मेहनत से बेहतर अंक ले पाते। परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों ने वर्षभर मेहनत की होती है। कोरोना के कारण इस बार उनकी पूरी मेहनत बेकार हुई है। इससे कई छात्रों में मायूसी है।
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