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कुल्लू धार्मिक पर्यटन स्थलों में मूलभूत सुविधाएं कोसो दूर

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सुविधाओं के अभाव में जिले के कई पर्यटन स्थल सूने
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सहूलियतें न होने से नहीं पहुंच पाते सैलानी
पर्यटन सीजन भाग-2
अमीचंद भंडारी
कुल्लू/खराहल (कुल्लू)। कुल्लू-मनाली में पर्यटन को विकसित करने के तमाम सरकारी दावे अभी सिरे नहीं चढ़ पाए हैं। धार्मिक स्थलों की हालात को देखकर इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। कुल्लू के बिजली महादेव, मणिकर्ण के खीरगंगा और रूद्रनाग, सरयोरलसर बूढ़ी नागिन मंदिर, काईस धार में जमलू ऋषि मंदिर, शांघड़ स्थित मनु ऋषि, शृंगाऋषि चैहणी की ऐतिहासिक कोठी, रघुपुरगढ़, मलाणा, मढासौर, फूटा सौर, दससौर और चंद्रखणी के मनमोहक धार्मिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं किया गया है। यहां न तो सड़कों की पहुंच है और न पर्यटकों को ठहरने के लिए होटल और रेस्तरां। ऐसे में देश-विदेश के सैलानी इन धार्मिक स्थलों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे पर्यटक कुल्लू-मनाली में दो दिन से ज्यादा ठहर नहीं पाते हैं। इस दिशा में अगर सरकार गंभीरता से पहल करे तो निश्चित ही यहां पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा और इससे स्वरोजगार के अवसर भी युवाओं के लिए खुलेंगे। वहीं, सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी। विडंबना यह है कि धार्मिक स्थलों को सड़कों से नहीं जोड़ा गया है और मूलभूत सुविधा भी सरकार उपलब्ध नहीं करवा पाई है। हर कोई सरकार एक-दूसरे पर नाकामी का ठीकरा फोड़ देते हैं मगर राजनीति से ऊपर उठ कर गंभीरता से इस ओर कारगर योजनाएं नहीं बना रहे हैं। इससे पर्यटन से जुड़े कारोबारी भी खासे खफा हैं। पर्यटन विभाग भी इस दिशा में गंभीरता से कदम नहीं उठा रहा है। महज कागजों में ही विकसित करने के दावे होते रहे हैं।
देवराज नेगी का कहना है कि कुल्लू जिले के कई धार्मिक स्थलों को सड़क से आजादी के साठ साल बाद भी नहीं जोड़ा गया। ऐसे में इन स्थलों तक पर्यटक भी नहीं पहुंच पाते हैं। कुल्लू के बिजली महादेव तथा नाग माहुंटी तक पहुंचने में सैलानियों को दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
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गोपाल ठाकुर कहते हैं कि मनाली के पांडू रोपा तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को काफी कठिनाई झेलनी पड़ती है। इस धार्मिक स्थल में मूलभूत सुविधाएं न होना और सड़क पर जगह-जगह गड्ढे पड़े हैं। इस सड़क की टारिंग उखड़ गई है।
हेमराज शर्मा कहते हैं कि मणिकर्ण घाटी के धार्मिक स्थल रूद्रनाग और खीर गंगा तक सड़क का निर्माण न होने से पर्यटकों की पहुंच से यह स्थल कोसों दूर है। इन स्थलों के विकसित होने से पर्यटकों की आमद में इजाफा होगा। लिहाजा, सरकार को इस ओर गंभीरता से पहल करनी चाहिए।
प्रताप पठानिया के अनुसार काईस कोठी के कई अनछुए धार्मिक स्थल का विकास पिछली सरकार ने नहीं किया है। इसमें सौर और सोयल मंदिर तथा रूमटूसौर को पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं किया है। अब सरकार इन स्थलों को विकसित करने के लिए प्रयासरत है।
कर्ण विष्ठ का कहना है कि भेखली माता और पूईद भुनेश्वरी माता जगन्नाथी के मंदिरों की सड़क संकरी होने से सैलानी जाम में फंस जाते हैं। ऐसे में एक बार सैलानी यहां आ जाते हैं तो दोबारा आने से कतराते हैं। सड़क को चौड़ा करने के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए।
सतीश महंत कहते हैं कि सरयोलसर झील और बूढ़ी नागिन मंदिर में पर्यटकों के लिए सड़क का निर्माण न होने से पर्यटक नहीं पहुंच पाते हैं। इस धार्मिक रमणीय स्थल के विकसित न होने से सैलानी नहीं पहुंच पाते हैं।
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भाजपा सरकार ने कुल्लू-मनाली के धामिक पर्यटन स्थल को विकसित करने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। सरकार बने महज अभी तीन माह ही हुए हैं लेकिन सरकार ने इन स्थलों को विकसित करने के लिए गंभीरता से पहल की है। बिजली महादेव रोप वे के लिए 150 करोड़ खर्च किया जाएगा। इस साल के बजट में पर्यटन के विकास के लिए कई नई स्कीमें रखी हैं। इससे निश्चित तौर पर धार्मिक पर्यटन स्थल का विकास होगा।
गोविंद सिंह ठाकुर वन, परिवहन एवं खेल मंत्री
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