कुल्लू जिले में काष्ठकुणी शैली के परंपरागत गांवों का वजूद साल-दर-साल आग की घटनाओं से मिटता जा रहा है। पुरातन भवनों के निर्माण की शैली भी इतिहास बनती जा रही है। पुरातन भवन निर्माण शैली से बने गांवों के वजूद बचाने के लिए प्रशासनिक और सरकार के तौर पर हर बार योजना बनाने के दावे किए जाते हैं लेकिन धरातल पर कोई ठोस प्रयास नहीं दिखता। जिला प्रशासन ने आग की घटनाओं के लिए संवेदनशील 64 गांव चिह्नित किए थे। इनमें एक लाख लाख लीटर पानी की स्टोरेज क्षमता के फेवरीकेटिड टैंक बनाने की योजना थी लेकिन यह योजना अभी धरातल पर नहीं उतरी है।