सोलन के रामशहर के पंदल के बलिदानी प्रदीप कुमार कारगिल युद्ध में देश की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर कर दिए थे। आज उनसे प्रेरणा लेकर गांव के बारह युवा देश की सरहदों के निगेहबान बने हैं। गांव के 12 युवाओं ने प्रदीप कुमार से प्रेरणा ली और देश के लिए कुछ भी करने की ठानी और सेना में भर्ती हो गए। नालागढ़ उपमंडल के रामशहर के पंदल गांव के 4 जेक राइफल के राइफलमैन प्रदीप कुमार (23) नौ जुलाई 1999 को बलिदान हो गए थे। प्रदीप कुमार उस समय 20 आरआर यूनिट में कुपवाड़ा में तैनात थे। भारत-पाक युद्ध शुरू होने से परिजनों की बेटे की शादी के लिए की तैयारियां भी धरी की धरी रह गईं।
घर में चल रही थी शादी की तैयारी, ताबूत में लौटे प्रदीप
शहीद प्रदीप कुमार की बहन जमना कौशिक ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान नौ जुलाई 1999 को उनके भाई ने देश के लिए कुर्बानी दी थी। उन्होंने कहा कि घर में भाई की शादी की तैयारियां चल रही थीं। भाई ताबूत में लिपटकर वापस आया। जमना ने बताया कि उनके जाने के बाद गांव के युवाओं ने उनसे प्रेरणा ली और आज गांव के 12 युवा देश सेवा के लिए सरहदों पर तैनात हैं। जब भी वह छुट्टियों में घर आते हैं तो उनके भाई की शहादत को याद करते हैं। जमना ने बताया कि उनके परिवार में भी देश सेवा का जज्बा पहले से ही है। उनके पिता जगन्नाथ भी सेना से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और 1961 और 1965 की लड़ाई लड़ चुके हैं।