जिस दिन बेटे ने सितारे हासिल किए, परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा
विकास के लेफ्टिनेंट बनने की खबर घर पहुंची तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जिस बेटे को परिवार ने मेहनत करते, नौकरी करते और अपने सपने के लिए तैयारी करते देखा था, उसे अब सेना की अफसर वाली वर्दी में देखना माता-पिता के लिए गर्व का क्षण है। विकास ने यह साबित कर दिया कि सपना देखने के लिए किसी खास परिवार में पैदा होना जरूरी नहीं है। उसे पूरा करने के लिए जुनून और मेहनत जरूरी है। उनकी कहानी उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद है, जो सामान्य परिवारों से आते हैं और बड़े सपने देखते हैं।
विकास ने पहले पुलिस की वर्दी पहनी, फिर अपने सपने की राह चुनी और आखिरकार भारतीय सेना के कंधों पर लेफ्टिनेंट के सितारे सजा लिए। सच ही कहा गया है कि मेहनत करने वालों की जीत देर से हो सकती है, लेकिन जब होती है तो कहानी बन जाती है। विकास गुलेरिया की कहानी भी ऐसी ही है।