हिमाचल प्रदेश के अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए गठित रोगी कल्याण समिति यानी आरकेएस के बजट को लेकर सरकार ने अपने पहले फैसले में संशोधन किया है। सरकार की ओर से जारी नई अधिसूचना के बाद अब अस्पतालों के लिए आरकेएस की राशि खर्च करने की सीमा स्पष्ट हो गई है।
नए आदेश के तहत मेडिकल कॉलेज, जोनल अस्पताल और सिविल अस्पताल आरकेएस बजट की 70 फीसदी राशि अपने स्तर पर खर्च कर सकेंगे। शेष 30 फीसदी राशि अस्पताल प्रशासन को कोषागार में जमा करवानी होगी। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों यानी सीएचसी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों यानी पीएचसी को आरकेएस की 100 फीसदी राशि खर्च करने की अनुमति दी गई है।
सरकार का यह संशोधित फैसला बड़े अस्पतालों में वित्तीय निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ छोटे और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित सीएचसी और पीएचसी को स्थानीय स्तर पर मरीजों की जरूरत के अनुसार तत्काल राशि खर्च करने की स्वतंत्रता रहेगी।
इससे पहले सरकार ने आरकेएस की पूरी राशि कोषागार में जमा करवाने का निर्णय लिया था। इस फैसले के बाद अस्पताल प्रबंधन को आशंका थी कि रोजमर्रा की जरूरतों और छोटे-मोटे कार्यों के लिए भी सरकारी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ेगी, जिससे मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं।