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Love Story: फेसबुक पर हुआ प्यार, वियतनाम से हिमाचल पहुंची दुल्हन; मंदिर में लिए सात फेरे

Wed, 15 Jul 2026 01:20 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर (कांगड़ा)।

सार

कांगड़ा जिले के जवाली क्षेत्र के युवक रजत ने सोशल मीडिया पर हुई दोस्ती के बाद वियतनाम की युवती से विवाह किया। युवती हजारों किलोमीटर का सफर तय कर हिमाचल पहुंची और फतेहपुर के श्री नृसिंह मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। परिवारों की सहमति से हुई यह शादी अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की अमलेला पंचायत के रजत ने वियतनाम की एचजिमवाया से हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह किया है। उनकी यह प्रेम कहानी फेसबुक पर शुरू हुई थी और अब जीवनभर के रिश्ते में बदल गई है। हजारों किलोमीटर की दूरी, अलग भाषा और संस्कृति भी उनके प्यार के आगे छोटी पड़ गई।

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रजत ने बताया कि उनकी पहचान फेसबुक के माध्यम से हुई थी। शुरुआत सामान्य बातचीत से हुई, जो धीरे-धीरे गहरे विश्वास और अपनेपन में बदल गई। यह दोस्ती प्रेम में विकसित हुई और दोनों ने जीवनसाथी बनने का फैसला किया। इस निर्णय को दोनों परिवारों ने भी सहमति दे दी। विवाह के लिए एचजिमवाया वियतनाम से भारत पहुंचीं। रजत उन्हें लेने दिल्ली गए और वहां से दोनों फतेहपुर स्थित श्री नृसिंह मंदिर, ठाकरां पहुंचे। मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाज के साथ विवाह संपन्न हुआ। परिजनों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में नवदंपती ने सात फेरे लेकर नए जीवन की शुरुआत की।

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भाषा और संस्कृति की बाधा नहीं
रजत का कहना है कि भाषा का अंतर उनके रिश्ते में कभी बाधा नहीं बना। उनके अनुसार, प्रेम सबसे प्रभावी भाषा है। उन्होंने बताया कि समय के साथ वे एक-दूसरे की भाषा और संस्कृति को भी बेहतर ढंग से समझ लेंगे। नवविवाहिता एचजिमवाया ने भारतीय परंपराओं के अनुसार हुए विवाह को अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि हिमाचल में उन्हें परिवार का स्नेह और अपनापन मिला, जिससे उनका नया सफर और भी खास बन गया है।

परिवारों का आशीर्वाद
दूल्हे के पिता सरताज सिंह सहित परिवार के सभी सदस्यों ने नवदंपती को आशीर्वाद दिया। उन्होंने उनके सुखी और सफल वैवाहिक जीवन की कामना की। विवाह संस्कार पंडित योगराज शर्मा ने वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न करवाया। यह प्रेम कहानी दर्शाती है कि जब रिश्ते विश्वास और सच्चे प्रेम पर आधारित हों, तो न भाषा की दीवार मायने रखती है, न ही देशों की सीमाएं।
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