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हिमाचल: आज बाजार जा रहे हैं तो जेब में नकदी जरूर रखें, UPI से नहीं होगा भुगतान; कारोबारी एक दिन की हड़ताल पर

Fri, 02 Oct 2026 10:33 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला।

सार

यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित टैक्स के विरोध में शुक्रवार, 2 अक्तूबर को प्रदेशभर के कारोबारी एक दिन की हड़ताल में शामिल होंगे। इस दौरान दुकानों पर यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान नहीं लिया जाएगा। ऐसे में बाजार में खरीदारी करने जाने वाले लोगों को पर्याप्त नकदी साथ रखने की जरूरत होगी। नकदी नहीं होने पर ग्राहकों को एटीएम से पैसे निकालने पड़ सकते हैं। कारोबारियों का कहना है कि वे यूपीआई के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था के विरोध में राज्य व्यापार मंडल के आह्वान पर एकजुट होकर हड़ताल कर रहे हैं।
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कारोबारी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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अगर आज आप बाजार में खरीदारी करने जा रहे हैं तो घर से निकलने से पहले अपनी जेब जरूर जांच लें। ऐसा इसलिए क्योंकि शुक्रवार को जिलेभर के कारोबारी यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित टैक्स के विरोध में प्रदेशभर के कारोबारी एकदिवसीय हड़ताल पर रहेंगे।
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इसका सीधा असर बाजार में खरीदारी करने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है। रोजमर्रा का सामान खरीदने से लेकर बड़ी खरीदारी तक के लिए आमतौर पर लोग मोबाइल से यूपीआई भुगतान करते हैं, लेकिन हड़ताल के दौरान दुकानदार डिजिटल भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे। ऐसे में ग्राहकों को खरीदारी के लिए पर्याप्त नकदी साथ रखनी होगी।

मोबाइल से भुगतान नहीं हुआ तो एटीएम का रुख करना पड़ेगा
पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई भुगतान लोगों की रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बन चुका है। अब बड़ी संख्या में लोग जेब में ज्यादा नकदी रखने के बजाय मोबाइल के जरिए भुगतान करना पसंद करते हैं। ऐसे में शुक्रवार को डिजिटल भुगतान बंद रहने से उन ग्राहकों को परेशानी हो सकती है, जो बिना कैश के बाजार पहुंचेंगे। खरीदारी के बाद भुगतान के लिए उन्हें नजदीकी एटीएम से नकदी निकालनी पड़ सकती है। खासकर रोजमर्रा का सामान खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह स्थिति असुविधाजनक हो सकती है। इसलिए कारोबारी संगठनों ने ग्राहकों से बाजार जाने से पहले पर्याप्त नकदी साथ रखने की अपील की है।

कचहरी व्यापार मंडल भी हड़ताल में शामिल
कचहरी व्यापार मंडल के अध्यक्ष मुनीष लुथरा ने बताया कि वीरवार शाम तक स्थानीय स्तर पर हड़ताल को लेकर संशय था। बाद में राज्य व्यापार मंडल के अध्यक्ष के साथ बातचीत के बाद स्थानीय व्यापार मंडल ने भी एकदिवसीय हड़ताल में समर्थन देने का निर्णय लिया। राज्य व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुमेश कुमार शर्मा ने कहा कि प्रदेशभर में एक दिन तक यूपीआई के माध्यम से लेन-देन नहीं किया जाएगा। कारोबारियों के अनुसार यह विरोध सरकार की ओर से 15 अक्तूबर से प्रस्तावित व्यवस्था के खिलाफ 2 अक्तूबर को किया जा रहा है।

कारोबारी बोले- यूपीआई सुविधाजनक, लेकिन कैश की भी अपनी जरूरत
नूरपुर के कारोबारी अजय कटोच ने कहा कि यूपीआई ग्राहकों के लिए काफी सुविधाजनक है। कई बार ग्राहक कैश लेकर नहीं आते, लेकिन मोबाइल से भुगतान कर देते हैं, जिससे बिक्री पूरी हो जाती है। हालांकि छोटे दुकानदारों के लिए हर लेन-देन का रिकॉर्ड और बैंकिंग से जुड़ी औपचारिकताएं संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

नूरपुर के कारोबारी राजकुमार ने कहा कि कारोबारी यूपीआई के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन छोटे भुगतान में नकद आज भी सुविधाजनक है। नेटवर्क की समस्या होने पर यूपीआई भुगतान रुक सकता है, जबकि नकद भुगतान में ऐसी परेशानी नहीं होती। इसी वजह से कई बार ग्राहकों से नकद भुगतान करने के लिए कहना पड़ता है।

धर्मशाला में भी केवल कैश लेने की तैयारी
धर्मशाला के कारोबारी अनुप गुप्ता ने कहा कि एक दिन की हड़ताल के चलते ग्राहकों से केवल नकद भुगतान लिया जाएगा। उन्होंने ग्राहकों से बाजार निकलने से पहले पर्याप्त नकदी साथ रखने की अपील की, ताकि खरीदारी के समय भुगतान को लेकर परेशानी न हो।
 
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वहीं धर्मशाला के कारोबारी गगनदीप ने कहा कि सरकार की ओर से यूपीआई पर लगाया जा रहा प्रस्तावित टैक्स गलत है। उनके अनुसार भले ही इसका छोटे कारोबारियों पर ज्यादा प्रभाव न पड़े, लेकिन वे बड़े कारोबारियों के साथ एक ही यूनियन में काम कर रहे हैं। इसलिए विरोध के तहत भुगतान केवल नकद में लिया जाएगा।

आज खरीदारी से पहले ये बात जरूर रखें ध्यान
शुक्रवार को बाजार जाने वाले लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि मोबाइल में यूपीआई ऐप होने का मतलब यह नहीं होगा कि वे दुकान पर भुगतान कर पाएंगे। हड़ताल के दौरान कारोबारी डिजिटल भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे।

इसलिए बाजार जाने से पहले जरूरत के हिसाब से नकदी साथ रखना बेहतर रहेगा। अगर नकदी कम पड़ गई तो एटीएम से पैसे निकालने की जरूरत पड़ सकती है। हड़ताल कितने कारोबारियों पर कितनी व्यापक होगी, यह स्थानीय बाजार और व्यापारिक संगठनों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।
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