धर्मशाला। सिविल अस्पताल कांगड़ा में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के बावजूद मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। मशीन खराब होने से मरीजों को मजबूरी में कई बार निजी क्लीनिकों में टेस्ट करना पड़ रहा है। हालत ये हैं कि साढ़े तीन माह से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें मजबूरन टांडा मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
अस्पताल को 2025 के नवंबर से रेडियोलॉजिस्ट मिल गई थीं लेकिन अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने से इसका मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। मरीजों को निजी अस्पतालों या क्लीनिकों में 800 से 1000 रुपये तक टेस्ट के लिए खर्च करने पड़ रहे हैं, जिसे गरीब वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
तकनीकी खामी के चलते अल्ट्रासाउंड मशीन लंबे समय से खराब पड़ी है। मशीन की मरम्मत या नई मशीन की व्यवस्था न होने से रोजाना आने वाले मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग बड़े-बड़े दावे तो करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। साढ़े तीन माह का लंबा समय बीत जाने के बावजूद मशीन दुरुस्त न होना स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
- सिविल अस्पताल कांगड़ा में नई अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए सरकार से बजट की मांग की गई है। फिलहाल फील्ड से अल्ट्रासाउंड मशीन लाने के बारे में विचार किया जा रहा है। अगर कहीं मशीन मिल जाती है तो उसे अस्पताल में स्थापित कर दिया जाएगा, जिससे मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
- डॉ. विवेक करोल, सीएमओ, कांगड़ा