धर्मशाला में मांगो के लिए प्रदर्शन करते हुए जिला पेंशनर संघ के सदस्य।
धर्मशाला। प्रदेश के पेंशनर लगातार अपनी मांगों को सरकार के समक्ष उठा रहे हैं और सरकार लगातार मांगों को अनदेखा कर रही है। ऐसे में पेंशनरों को मजबूरन आंदोलन की राह पर चलना पड़ा है। मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के विभिन्न पेंशनर्स संघों ने नवगठित पेंशनर ज्वाइंट फ्रंट के बैनर तले धर्मशाला में धरना प्रदर्शन और रैली निकाल प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद जिला प्रशासन के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा गया।
पेंशनर ज्वाइंट फ्रंट के प्रदेश प्रवक्ता कल्याण भंडारी ने कहा कि जनवरी 2016 से लेकर जनवरी 2022 के दौरान सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों का लाखों रुपये का एरियर सरकार के पास लंबित है। सरकार पांच प्रकार के भुगतान पर कुंडली मारकर बैठी है। उन्होंने कहा कि एक आकलन के अनुसार एक पेंशनर का करीब दस लाख रुपये सरकार के पास पड़ा है। वर्ष जनवरी 2016 से जनवरी 2022 के दौरान लगभग 43 हजार कर्मी सेवानिवृत्त हुए। ऐसे में प्रति कर्मी 10 लाख रुपये के हिसाब से पेंशनरों का करोड़ों रुपये सरकार के पास है। प्रदेश की वित्तीय स्थिति ठीक न होने के चलते प्रदेश सरकार पेंशनर को करोड़ों रुपये के लंबित भुगतान करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस अवधि के बीच सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को थोड़ा-थोड़ा करके भुगतान करने की दिशा में सरकार आगे बढ़े। पेंशनर के करोड़ों रुपये के मेडिकल बिल सरकार के पास लंबित पड़े हैं। कई पेंशनर जिनका निधन हो गया है, उनके आश्रित भी सरकार की ओर से देय लाभ की आस में लगाए बैठे हैं। धरना-प्रदर्शन और रैली के माध्यम से हम अपनी मांगों को सरकार के समक्ष पहुंचाना चाहते हैं, जिससे सरकार पेंशनरों को उनके हक दे। सरकार को ज्ञापन भेजा गया है, जिस पर सरकार सकारात्मक रुख अपनाती है तो ठीक है अन्यथा पेंशनर के हक में ज्वाइंट फ्रंट उग्र रुख अख्तियार करेगा।