धर्मशाला। किसानों की ओर से बिजी गई गेहूं की फसल में इस बार पीले रतुआ का कम प्रभाव पड़ा है। इस बार मौसम में बदलाव और बारिश कम होने के चलते गेहूं की फसलों में रतुआ नहीं पाया गया है।
गेहूं की फसलों में पीला रतुआ बारिश होने के बाद जमीन में होने वाली नमी के चलते पाया जाता है, लेकिन इस बार जमीन में नमी न होने के कारण गेहूं की फसलों का पीले रतुआ से बचाव हो गया है। हालांकि, कृषि विभाग ने फसलों को रतुआ से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए समय-समय पर निदान टीमें भी गठित कर दी थीं, जो किसानों के खेतों में पहुंच कर समय पर जांच कर रही थीं।
कृषि विभाग की ओर से हिमाचल के पांच जिलाें में गेहूं की पैदावार का 224 हजार हेक्टेयर पर 429 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है। जिला कांगड़ा में विभाग ने 92 हजार हेक्टेयर भूमि पर 176.88 हजार मीट्रिक टन और चंबा के 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 32.47 मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा है। वहीं, जिला हमीरपुर की 28 हजार हेक्टेयर भूमि पर 53.48 हजार मीट्रिक टन, मंडी के 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 114.60 मीट्रिक टन, ऊना के 27 हजार हेक्टेयर में 51.57 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में गेहूं की फसल की कटाई शुरू हो चुकी है।
कोट्स:
जिला में गेहूं की फसल की कटाई शुरू हो गई है। जल्द ही प्रदेश के उत्तरी क्षेत्र में इस बार कितनी पैदावार हुई है, उसका आंकड़ा इकट्ठा कर लिया जाएगा। इस उत्तरी क्षेत्र में 224 हजार हेक्टेयर पर 429 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है।
-राहुल कटोच, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग, उत्तरी क्षेत्र