देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। नगर परिषद देहरा की सियासत में पिछले तीन दशकों से एक अनोखी परंपरा कायम है, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर रखा है। साल 1994-95 में नगर पंचायत बनने से लेकर साल 2013 में नगर परिषद के अपग्रेडेशन तक, यहां की अध्यक्ष की कुर्सी पर अब तक किसी पुरुष को बैठने का मौका नहीं मिला है। हर बार इस प्रतिष्ठित पद पर महिलाओं ने ही कब्जा जमाया है।
इस सियासी सफर की शुरुआत कलावती ने की थी, जो देहरा नगर पंचायत की पहली निर्वाचित अध्यक्ष बनीं। दिलचस्प बात यह है कि उनकी बहू सुनीता कुमारी ने इस परंपरा को और मजबूती दी और लगातार तीन बार अध्यक्ष बनकर एक रिकॉर्ड कायम किया। इनके अलावा नीलम चौहान भी दो बार इस कुर्सी पर काबिज रह चुकी हैं।
पुरुष मतदाता आगे पर महिला राज का दबदबा
देहरा के मतदाता आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 3,512 मतदाताओं में 1,768 पुरुष और 1,743 महिलाएं हैं। संख्या के लिहाज से पुरुष मतदाता मामूली रूप से आगे हैं, लेकिन राजनीतिक सूझबूझ और चुनावी समीकरणों में महिलाएं हमेशा भारी पड़ी हैं।
क्या इस बार बदलेगा इतिहास?
वर्तमान चुनाव में अध्यक्ष पद सामान्य श्रेणी के लिए खुला है, जिससे तीन दशकों के इतिहास में पहली बार पुरुष प्रत्याशियों के बीच उम्मीद जगी है। कई पुरुष चेहरे मजबूत दावेदारी के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, देहरा की जनता का मिजाज और महिलाओं की सशक्त चुनावी पकड़ को देखते हुए इस किले को भेदना आसान नहीं होगा। अब देखना यह है कि क्या इस बार देहरा को पहला पुरुष अध्यक्ष मिलेगा या महिला नेतृत्व का राज बरकरार रहेगा।
सुनीता कुमारी
सुनीता कुमारी