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Kangra News: तमगा स्मार्ट सिटी वाला... कहीं शौचालय बिना छत के तो कहीं वर्षों से लगा ताला <bha>--</bha><bha>--</bha><bha>--</bha><bha>--</bha><bha>--</bha><bha>--</bha><bha>--</bha>-

Wed, 15 Apr 2026 12:49 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
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एसएस बैंस। - फोटो : रामनगर गांव में बच्चे की मौत के बाद बिलखते परिजन।
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ग्राउंड रिपोर्ट
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धर्मशाला में जमीनी हालात बदहाल, कोतवाली बाजार के गुरुद्वारा रोड बिना दरवाजों के शौचालय, कचहरी, डिपो बाजार में भी खस्ताहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। स्मार्ट सिटी का तमगा हासिल कर चुके धर्मशाला में जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आती है। शहर में सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति ऐसी है कि कहीं छत नहीं, कहीं दरवाजे गायब हैं तो कहीं बने-बनाए शौचालयों पर वर्षों से ताले जड़े हुए हैं। ऐसे में स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल खड़े होना लाजिमी है।
संवाददाता ने जब शहर के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया तो कोतवाली बाजार के गुरुद्वारा रोड पर सड़क के किनारे बने शौचालय वर्षों से बिना दरवाजों के खड़े मिले। यहां केवल नाम के लिए पब्लिक टॉयलेट का बोर्ड लगा है, जबकि अंदर न पानी की व्यवस्था है और न ही जरूरी सुविधाएं।
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इसी तरह निचले क्षेत्र में बने अन्य शौचालय भी अधूरी हालत में पड़े हैं। कचहरी अड्डा से डिपो बाजार रोड पर निर्माणाधीन शौचालय लंबे समय से छत का इंतजार कर रहे हैं। इसके विपरीत वार्ड सात में बने कुछ अच्छे शौचालयों पर ताले लटके हुए हैं, जिससे उनकी उपयोगिता पर सवाल खड़े होते हैं।
बस अड्डा के पास गांधी वाटिका में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए ई-टॉयलेट कबाड़ बनने के बाद हटाए जा चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बजट तो पास होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुविधाएं नजर नहीं आतीं।
जब भी नगर निगम प्रबंधन को शौचालयों के बारे में पूछा जाता है तो बताया जाता है कि प्रस्ताव बनाया गया है लेकिन ऐसा लगता है कि यह कागजाें तक ही सीमित है। कुछ शौचालय में साइन बोर्ड नहीं हैं और नाममात्र के साइन बोर्ड लगाए गए हैं। - एसएस बैंस, निवासी, धर्मशाला

डिपो बाजार रोड पर निर्माणाधीन शौचालयों के कार्य को पूरा करने के लिए कई ठेकेदार आए और काम छोड़कर चले गए लेकिन आज दिन तक इन सार्वजनिक शौचालयों को छत नहीं मिल सकी। - हरवीन लाल, निवासी, धर्मशाला



हर साल नगर निगम के बजट में सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण और रखरखाव के लिए करोड़ों रुपये के बजट का प्रावधान रखा जाह है लेकिन स्थिति देखकर लगता है कि यह मात्र कागजों तक ही सीमित रह जाता है। - सागर चंद, निवासी, धर्मशाला

धर्मशाला को स्मार्ट सिटी के साथ पर्यटन नगरी भी कहा जाता है लेकिन यहां अभी भी सार्वजनिक शौचालयों जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव है। -साहिल ठाकुर, निवासी धर्मशाला

शहर में अभी भी सार्वजनिक शौचालयों का अभाव व शौचालयों का निर्माण न हो पाना जन प्रतिनिधियों की नाकामी का परिणाम है। इन मूलभूत सुविधाओं का न होना यह साबित कर रहा है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर हम कहां खड़े हैं। रविकांत शर्मा, कारोबारी, धर्मशाला
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गांधी वाटिका में स्थापित सार्वजनिक शौचालय को शुरू कर दिया गया है। कोतवाली बाजार के सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव कार्य के लिए टेंडर आवंटित कर दिया गया है। गुरुद्वारा रोड और डिपो बाजार के सार्वजनिक शौचालयों का कार्य भी शीघ्र करवा दिया जाएगा। - नीनू शर्मा, महापौर, नगर निगम धर्मशाला

एसएस बैंस।- फोटो : रामनगर गांव में बच्चे की मौत के बाद बिलखते परिजन।

एसएस बैंस।- फोटो : रामनगर गांव में बच्चे की मौत के बाद बिलखते परिजन।

एसएस बैंस।- फोटो : रामनगर गांव में बच्चे की मौत के बाद बिलखते परिजन।

एसएस बैंस।- फोटो : रामनगर गांव में बच्चे की मौत के बाद बिलखते परिजन।

एसएस बैंस।- फोटो : रामनगर गांव में बच्चे की मौत के बाद बिलखते परिजन।

एसएस बैंस।- फोटो : रामनगर गांव में बच्चे की मौत के बाद बिलखते परिजन।

एसएस बैंस।- फोटो : रामनगर गांव में बच्चे की मौत के बाद बिलखते परिजन।

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