पालमपुर (कांगड़ा)। जम्मू क्षेत्र के लोग भी अब सुगंधित फसलों से अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकेंगे। इन फसलों के लिए अनुकूल जलवायु होने के कारण यहां पर ये फसलें किसानों को काफी लाभ दे सकती है, जबकि कीट-पतंगों से दूर व रोग प्रतिरोधक क्षमता रखने वाली ये फसलें काफी मात्रा में होंगी।
काफी कम खर्चे वाली और अधिक मुनाफे वाली इन फसलों को लेकर वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) पालमपुर सहयोग कर रही है। इसी के चलते सीएसआईआर में किसानों को सुगंधित फसलों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। अपनी आर्थिकी के लिए जम्मू क्षेत्र के किसान पारंपरिक रूप से गेहूं, मक्का, हल्दी, तिल और बाजरा जैसी फसलें अपने गुजर-बसर के लिए उगाते हैं, लेकिन इन्हें बंदरों, मोरों और जंगली सूअरों के की ओर से नुकसान के साथ-साथ वर्षा पर निर्भर कृषि जैसी प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इससे उनकी फसल उत्पादकता और आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
सीएसआईआर में किसानों को सुगंधित फसलों का प्रशिक्षण दिया गया। संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. राकेश कुमार ने जम्मू क्षेत्र के लिए उपयुक्त प्रमुख सुगंध फसलों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि यह फसलें कीटों और रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी हैं। अधिक मूल्य देने वाली ये फसलें एरोमाथेरेपी, खाद्य, सौंदर्य प्रसाधन, सुगंध, टॉयलेटरीज़ और औषधि उद्योगों में अपार संभावनाएं रखती हैं। किसान दमस्क गुलाब, लेमनग्रास, तुलसी, पुदीना, सुगंधित गेंदे, कैमोमाइल और पामारोसा जैसी फसलें उगा सकते हैं। इन फसलों के लिए जम्मू क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के लिए उपयुक्त हैं। इनकी बाजार में भी उच्च मांग है। डॉ. सनत सुजात सिंह ने संस्थान की ओर से विकसित इन फसलों की उच्च उत्पादक किस्मों के बारे में जानकारी दी।
सीएसआईआर उत्तर-पश्चिमी हिमालय में सुगंध और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। जम्मू क्षेत्र में इन फसलों के लिए अच्छी जलवायु होने से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
- डॉ. सुदेश कुमार यादव, निदेशक, सीएसआईआर पालमपुर