धर्मशाला। सेवा में कमी के कारण जिला उपभोक्ता आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को नौ फीसदी ब्याज के साथ शिकायतकर्ता को 80 हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं। साथ ही 10 हजार रुपये हर्जाने और 10 हजार रुपये रुपये मुकद्दमेबाजी के लिए भी देने को कहा है। यह फैसला जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा और सदस्य आरती सूद की अदालत ने सुनाया है।
जानकारी के मुताबिक बालकृष्ण सूद और उनकी पत्नी कामिनी सूद ने इंश्योरेंस कंपनी टाटा एआईजी से पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। इस इंश्योरेंस की अवधि 26 जुलाई 2022 से 25 जुलाई 2023 तक थी। मार्च 2023 में बालकृष्ण सूद को बीमारी के कारण मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में दाखिल करवाया गया। इस दौरान उनके इलाज पर अस्पताल ने 62,470 रुपये का का बिल दिया। इसके बाद उपभोक्ता ने संबंधित इंश्योरेंस कंपनी को बिल अदायगी संबंधी सभी दस्तावेज भेजे लेकिन बीमा कंपनी ने भुगतान में देरी की और बार-बार आपत्तियां उठाईं। इसके कारण मरीज को अस्पताल में देर तक रोके रखा गया। वहीं, बाद में जुलाई 2023 में उनकी पत्नी कामिनी सूद की आंखों की सर्जरी पालमपुर स्थित रोटरी आई अस्पताल में हुई, जिसका बिल 17,640 रुपये बना लेकिन कंपनी ने इस बिल की भी अदायगी नहीं की।
पीड़ित बालकृष्ण सूद और कामिनी सूद ने इसकी शिकायत उपभोक्ता आयोग में कर दी। इस पर फैसला सुनाते हुए उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 80,093 रुपये की राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित शिकायत की तारीख से भुगतान करने के आदेश दिए। वहीं 10,000 रुपये मुआवजा और 10,000 रुपये मुकदमे का खर्च भी शिकायतकर्ता को अदा करने के लिए कहा।