पालमपुर (कांगड़ा)। कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बतरा की शौर्यगाथा अब स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनने जा रही है। इस निर्णय से जहां देशवासियों में गर्व की भावना है, वहीं बलिदानी कैप्टन के पिता जीएल बतरा की वर्षों पुरानी मांग भी पूरी हो गई है। 25 वर्षों से केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को पत्र लिख रहे जीएल बतरा अब राहत और गर्व महसूस कर रहे हैं कि आखिरकार उनके बेटे की वीरता की कहानी अगली पीढ़ी को पढ़ाई जाएगी। जीएल बतरा ने बताया कि आज उन्हें इस बात की खुशी है कि उनके बेटे की शौर्यगाथा आने वाली पीढ़ी पढ़ेगी।
अब उनकी आस पूरी हो गई है। इससे वह खुश हैं और गर्व भी महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश के पहले परमवीर चक्र विजेता बलिदानी मेजर सोमनाथ शर्मा और कारगिल युद्ध के परमवीर चक्र विजेता विक्रम बतरा की शौर्यगाथा की कहानी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीआईआरटी) की आठवीं कक्षा की अंग्रेजी की पुस्तक पूर्वी में शामिल की गई है। छात्र वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2025-26 से ही इसे पढ़ेंगे।