धर्मशाला। प्रदेश सरकार की ओर से हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का निर्णय संविधान में निहित सामाजिक न्याय, समानता एवं प्रशासनिक सुगमता के सिद्धांतों के अनुरूप लिया गया महत्वपूर्ण कदम है।
चौधरी फाउंडेशन के अध्यक्ष रॉबिन कौंडल ने कहा कि संस्था सरकार के इस निर्णय का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की ओबीसी आबादी का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा कांगड़ा जिला एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में निवास करता है। ऐसे में आयोग का कार्यालय धर्मशाला में स्थापित होने से पिछड़े वर्ग के नागरिकों को अपनी शिकायतें, सुझाव एवं आवेदन प्रस्तुत करने में भौगोलिक और आर्थिक दृष्टि से सुविधा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि हाल ही में उच्च न्यायालय में दायर याचिका, जिसके माध्यम से इस स्थानांतरण प्रक्रिया पर विचाराधीन स्थिति उत्पन्न हुई है, इसके संदर्भ में चौधरी फाउंडेशन यह स्पष्ट करना चाहता है कि किसी भी सांविधानिक अथवा वैधानिक आयोग के कार्यालय का स्थान निर्धारण राज्य सरकार का नीतिगत एवं प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र होता है, बशर्ते यह निर्णय मनमाना न होकर तथ्यों, आंकड़ों और व्यापक जनहित पर आधारित हो।
कहा कि संस्था को पूर्ण विश्वास है कि हिमाचल प्रदेश सरकार उच्च न्यायालय के समक्ष सभी प्रासंगिक तथ्यों, आंकड़ों और सांविधानिक प्रावधानों के आधार पर अपना पक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगी। संवाद