परागपुर (कांगड़ा)। शिव-पार्वती मंदिर अपर परागपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित सुमित शास्त्री ने सती चरित्र वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर ही ऐसे देवता हैं जिनकी दो तरह से पूजा होती है। शिवलिंग निराकार रूप, मूर्ति में साकार रूप में, शिवलिंग का अर्थ है चिह्न। शिवलिंग जो है वो ज्योति रूप और ये पिंडी निराकार ज्योति का प्रतीक है।
शास्त्री ने कथा में बताया कि पूजा एक योग है, जहां हम मूर्ति के माध्यम से मन को परमात्मा में स्थिर करते हैं। यदि श्रवण, मनन और कीर्तन न कर सकें तो केवल नित्य शिवलिंग के पूजन मात्र से परमात्मा की प्राप्ति कर सकते हैं। इसके बाद शास्त्री ने बताया कि भगवती सती ने भोलेनाथ के साथ अपने पिता के घर जाने के लिए हठ किया, जिससे उन्हें योगाग्नि में भस्म होना पड़ा। कथा के बीच सुंदर भजन जब कोई नहीं आता मेरे श्याम आते हैं और हो भोलया तेरी महिमा है अपरमपार ने आए हुए भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कथा में कुलवंत सिंह, विंकल कंवर, नीतीश शर्मा, पृथ्वी सिंह, दिनेश, काजल, सीमा, सपना रानी और प्रेमलता आदि ने भाग लिया।