पालमपुर (कांगड़ा)। सुलह विधानसभा क्षेत्र के विधायक विपिन सिंह परमार ने कांगड़ा वैली कार्निवाल के नाम पर व्यापारियों, पेट्रोल पंप संचालकों, एलपीजी एजेंसियों, आटा–चावल मिलों और ईंट भट्टा मालिकों से योगदान मांगने को गलत करार दिया है। परमार ने कहा कि यह कोई सांस्कृतिक सहयोग नहीं, बल्कि सरकारी ठप्पे के साथ जबरन वसूली है। इससे साफ हो गया है कि कांग्रेस सरकार प्रदेश को चलाने में नाकाम हो चुकी है और अब अपनी विफलताओं का बोझ व्यापारियों और आम जनता पर डाल रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की वित्तीय हालत इस कदर चरमरा चुकी है कि सरकार के पास अपने ही आयोजन करवाने के पैसे नहीं बचे हैं। सवाल यह है कि क्या अब हिमाचल, कांग्रेस सरकार की जागीर बन गया है। जहां मुख्यमंत्री और उनके अफसर तय करेंगे कि किससे कितनी वसूली करनी है। परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री जनता के साथ न्याय करने में विफल साबित हुए हैं।
जिन झूठी गारंटियों और खोखले वादों के सहारे कांग्रेस सत्ता में आई थी, वे आज मलबे में तब्दील हो चुके हैं। परमार ने चेतावनी दी कि यदि योगदान न देने वाले व्यापारियों को निरीक्षण, लाइसेंस रद्द करने या किसी भी प्रकार की प्रताड़ना का सामना करना पड़ा तो भाजपा इसे खुली राजनीतिक लड़ाई मानेगी। इस सरकारी वसूली तंत्र के खिलाफ सड़क से सदन तक आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।