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डीसी साहब, हमें दूसरी बार फिर उजड़ने से बचा लो 17-41-27

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धर्मशाला/कांगड़ा। पौंग डैम की जद में आने के बाद अपने क्षेत्र को छोड़कर कांगड़ा के साथ लगते ललेहड़ गांव में बसे लोग फिर बेघर होने जा रहे हैं। शिमला-मटौर फोरलेन में घर और जमीन आने से प्रभावित हुए ललेहड़ के लोगों ने वीरवार को उपायुक्त से गुहार लगाते हुए कहा कि करीब 48 साल पहले पौंग डैम में घर और जमीन आने के बाद वह यहां आकर बसे थे पर अब फोरलेन में भी उनके ही घर उजड़ रहे है। ऐसे में उन्हें उजड़ने से बचाया जाए।
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कांगड़ा के ललेहड़ में करीब 15 परिवार ऐसे है जिनको दोबारा विस्थापन का दंश झेलना पड़ रहा है। इन सबकी जमीनें और घर पूरी तरह से फोरलेन की जद में आ रहे हैं। उन्होंने उपायुक्त के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि हमारे मकानों को जानबूझ कर फोरलेन में डाला गया है। इन परिवारों का कोई भी सदस्य सरकारी और गैर सरकारी नौकरी में है। अब हम दोबारा विस्थापन नहीं कर सकते। डीसी डॉ. निपुण जिंदल ने लोगों की बात सुनते हुए एसडीएम कांगड़ा को फोन पर प्रभावितों के साथ बैठकर समस्या का हल निकालने की भी आदेश दिए। ललेहड़ गांव की पूर्व पंच सुमन बाला, मदन लाल, पवन कुमार, सतीश कुमार, बीर सिंह, मान चंद, जगपाल, चंचला देवी, सत्या देवी, रीना देवी, सरोज कुुमारी, भगवानदास ने बताया कि पौंग विस्थापित होने के बाद ललेहड़ में अपने पुराने विस्थापन के दर्द को भूलने की कोशिश कर ही रहे थे कि अब फोरलेन की वजह से दोबारा विस्थापन करना पड़ेगा। यह सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि जनवरी में उपायुक्त और एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को अपनी मांगों को लेकर अवगत करवाया था पर आज दिन तक कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि सरकार से गुहार लगाई है कि लोगों के घरों को उजड़ने से बचा लो नहीं तो सभी परिवारों को भूख हड़ताल और चक्का जाम करने पर मजबूर होना पड़ेगा। उधर, इन लोगों ने विधायक पवन काजल से भी मिलकर अपना दुखड़ा सुनाया।
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