देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। राजकीय प्राथमिक विद्यालय चनौर में मिड-डे मील वर्कर की नृशंस हत्या के बाद स्कूल में पसरे खौफ और सन्नाटे को पुलिस प्रशासन ने एक मानवीय स्पर्श से दूर कर दिया। शनिवार को देहरा के एसपी मयंक चौधरी खुद स्कूल पहुंचे और बच्चों के मन से उस काली घटना की यादों को मिटाने के लिए मैदान में खो-खो प्रतियोगिता आयोजित करवाई।
खेल के मैदान में जब मासूम बच्चे दौड़े और उनकी किलकारियां गूंजीं तो कई दिनों से छाया तनाव मुस्कुराहट में बदल गया। एसपी ने खुद बच्चों को चॉकलेट बांटी और एक अभिभावक की तरह उनके बीच समय बिताकर यह अहसास कराया कि वे सुरक्षित हैं। स्कूल परिसर में जिस जगह कल तक दहशत का माहौल था, वहां शनिवार सुबह एसपी ने संवेदनशीलता की नई मिसाल पेश की।
उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर उनके भविष्य के सपनों पर बात की। इस दौरान जब एसपी ने उनसे पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं तो कई बच्चों ने उत्साह के साथ पुलिस और सेना में जाने की इच्छा जताई। बच्चों के हाथों में चॉकलेट और उनके चेहरों की चमक ने यह साबित कर दिया कि खेल और सही मार्गदर्शन किसी भी डर को हरा सकता है।
इस अवसर पर मंजू बाला, बेबी, पूजा देवी, सपना देवी, शालु, संजीव कुमार और बबिता कुमारी सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
बच्चों के सामने न करें घटना का जिक्र
एसपी मयंक चौधरी ने बच्चों के साथ-साथ वहां मौजूद अभिभावकों की भी विशेष काउंसलिंग की। उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे घर के भीतर इस हादसे की चर्चा बिल्कुल न करें, क्योंकि बच्चों का कोमल मन ऐसी बातों से विचलित हो सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सामान्य जीवन में वापस लाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। एसपी ने पुलिस की ओर से पुख्ता सुरक्षा का भरोसा देते हुए अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई और खेलकूद पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।