धर्मशाला। प्रदेश में हाल के वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं के पीछे जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ अनियोजित विकास भी एक प्रमुख कारण है। यह बात सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी एवं पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार सोमल ने मंगलवार को धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि विकास कार्यों के दौरान पर्यावरणीय संतुलन की अनदेखी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम का स्वरूप तेजी से बदल रहा है जिससे कहीं सूखे तो कहीं अतिवृष्टि और बाढ़ जैसी परिस्थितियां बन रही हैं।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर की जा रही कटिंग से पर्वतों की प्राकृतिक ढलान और वनस्पति को नुकसान पहुंचा है। इसके चलते भूस्खलन और मलबा बहने की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। विकास कार्यों के दौरान वैज्ञानिक मानकों और पर्यावरणीय पहलुओं की अनदेखी भविष्य में और गंभीर संकट पैदा कर सकती है।
20 जून से उन्होंने फतेहपुर, पालमपुर, सराज, शिकारी देवी और करसोग क्षेत्रों का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि वर्ष 2025 में सबसे अधिक नुकसान सराज घाटी में हुआ जहां वाखली खड्ड में भारी मात्रा में पानी, मिट्टी और लकड़ियां बहकर आईं। इसके कारण पौंग बांध में भी बड़ी मात्रा में गाद जमा हुई जिससे उसकी जल भंडारण क्षमता प्रभावित हो रही है। ब्यूरो