धर्मशाला। पंचरुखी क्षेत्र की उपभोक्ता की करीब 10 साल पुरानी वॉशिंग मशीन का जरूरी पुर्जा उपलब्ध न करवाना एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स को महंगा पड़ा है। जिला उपभोक्ता विवाद ने कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी मानते हुए 45 दिन के भीतर मशीन को चालू हालत में करने के आदेश दिए हैं।
इसके लिए कंपनी को असली और अनुकूल मुख्य पीसीबी या जरूरी पुर्जा उपलब्ध करवाना होगा। पुर्जा उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में कंपनी को मशीन का 15 हजार रुपये वापसी मूल्य नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देना होगा।
पंचरुखी के भरवाना निवासी अमिता शर्मा ने आयोग में शिकायत दायर की थी। उनके पति ने अक्तूबर-नवंबर 2015 में करीब 60 हजार रुपये में घरेलू इस्तेमाल के लिए एलजी की फ्रंट लोड वॉशिंग मशीन ड्रायर समेत खरीदी थी। नवंबर 2025 में करीब दस साल इस्तेमाल के बाद मशीन खराब हो गई।
शिकायतकर्ता ने 21 नवंबर को कंपनी के अधिकृत सेवा केंद्र में शिकायत दर्ज करवाई। जांच के दौरान तकनीकी कर्मचारी ने बताया कि मशीन का मुख्य पीसीबी खराब है और उसका पुर्जा उपलब्ध नहीं है। इसके बाद भी कई बार शिकायत और उच्च स्तर पर मामला उठाने के बावजूद मशीन ठीक नहीं हो सकी।
कंपनी ने आयोग में दावा किया कि मशीन की अनुमानित उम्र सात वर्ष थी और संबंधित मॉडल के पुर्जों का निर्माण वर्ष 2022 में बंद हो चुका था। कंपनी ने यह भी कहा कि अगस्त 2025 तक उपलब्ध पुर्जों के बाद मशीन के लिए पुर्जा उपलब्ध नहीं था। हालांकि आयोग ने कंपनी की दलील को स्वीकार नहीं किया।
आयोग ने कहा कि खरीद के समय उपभोक्ता को यह जानकारी नहीं दी गई थी कि मशीन की उपयोग अवधि सात वर्ष तक सीमित होगी या भविष्य में जरूरी पुर्जों की उपलब्धता बंद कर दी जाएगी।
आयोग ने कहा कि वारंटी अवधि समाप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि निर्माता जरूरी पुर्जों की उपलब्धता पूरी तरह खत्म कर दे। उपभोक्ता को उचित अवधि तक महंगे घरेलू उपकरण की मरम्मत की सुविधा मिलने की उम्मीद रहती है। आयोग ने मुख्य पुर्जा उपलब्ध न कराने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की अदालत ने फैसला सुनाया कि कंपनी को मशीन ठीक करने के आदेश के साथ उपभोक्ता को मानसिक परेशानी, शारीरिक उत्पीड़न और आर्थिक नुकसान के लिए 25 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये भी देने होंगे।
पुर्जा उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में 15 हजार रुपये वापसी मूल्य पर शिकायत दायर करने की तारीख से अंतिम भुगतान तक 9 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा।