परागपुर (कांगड़ा)। परागपुर में वर्षों से उपेक्षा का शिकार हो रहा 70 साल पुराना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएसची) अब प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गया है। जर्जर हालत में पहुंच चुके अस्पताल भवन और सरकारी भूमि से जुड़े मामले के सरकार तक पहुंचने के बाद प्रशासन हरकत में आया है और भूमि व राजस्व रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। इससे लोगों में अस्पताल भवन के सुधार या फिर नया भवन मिलने की उम्मीद जगी है।
1950 के दशक में तत्कालीन पंजाब सरकार की ओर से स्थापित यह स्वास्थ्य संस्थान कभी क्षेत्र का प्रमुख सिविल अस्पताल माना जाता था। उस समय यहां रात्रि ओपीडी सुविधा, चालक और लिपिक यहां सेवारत थे।
स्थानीय निवासी अमी चंद, रमेश कुमार, अमन कुमार, पंकज, रितेश, निलेश कुमार, रमन और प्रेम आदि के अनुसार वर्षों से उपेक्षा झेल रहा यह अस्पताल अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। राजस्व रिकॉर्ड में लगभग नौ कनाल छह मरले भूमि सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग के नाम दर्ज है, जबकि कुल 14 कनाल से अधिक भूमि पर लंबे समय से सरकारी कब्जा चला आ रहा है।
मामला सरकार तक पहुंचने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। प्रदेश सरकार ने इस विषय को उपायुक्त कांगड़ा के पास भेजा, जिसके बाद डीसी कांगड़ा ने डीआरओ कांगड़ा और एसडीएम देहरा को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
वहीं, परागपुर अब उपमंडल बन चुका है, इसलिए यहां केवल पुराने भवन की मरम्मत नहीं बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से युक्त नए भवन और संस्थान के दर्जा वृद्धि की आवश्यकता है। ग्रामीणों ने कहा कि वे आगामी ग्राम सभा बैठक में इस विषय को प्रमुखता से उठाएंगे।
सरकारी भूमि, कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े तथ्यों की जांच नियमानुसार की जा रही है। सीमांकन एवं तकसीम संबंधी औपचारिकताएं भी अमल में लाई जा रही हैं और आगामी आवश्यक राजस्व कार्रवाई भी नियमानुसार लाई जाएगी। कुलवंत सिंह पोटन, एसडीएम देहरा