नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)। राज्य स्तरीय जलाशय विकास समिति के मनोनीत गैर सरकारी सदस्य डाॅ. एचएल धीमान ने कहा कि शिमला में उच्च स्तरीय बैठक में मछुआरों की समस्याओं पर चर्चा हुई। इस दौरान समस्याओं के समाधान के लिए समिति सदस्यों ने सुझाव भी रखे और सरकार को भेजे गए। उन्होंने कहा कि बैठक में उन्होंने पौंग झील में कार्यशील साढ़े तीन हजार मछुआरों को पेश विभिन्न समस्याओं को समिति के समक्ष उठाया और विकास के अन्य सुझाव भी दिए।
मत्स्य विभाग मछली पालन और मछुआरों के कल्याण के लिए विभिन्न तरह की कल्याणकारी और आर्थिक अनुदान की योजनाएं चलाता है लेकिन इन योजनाओं की गहन जानकारी मछली पालकों और मछुआरों के पास नहीं होती। मछली पालकों और मछुआरों की जानकारी के लिए विभाग को जनता की जागरूकता के लिए प्रशिक्षण शिविर निरंतर आयोजित करने चाहिए। मछुआरों के हित में संचालित बीमा योजनाएं जो कि अत्यधिक जटिल हैं, उनको सरल और प्रभावी बनाया जाए।
वहीं, मछुआरों को उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों की तर्ज पर मृत्यु होने की स्थिति में आर्थिक लाभ मिलने चाहिएं। मछुआरों को ऑफ सीजन में मिलने वाली राशि को बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्य प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए। हिमाचल में स्थित मानव निर्मित पांच झीलों में प्रतिवर्ष टनों के हिसाब से मछली उत्पादन होता है। इस वर्ष भी 31 मार्च तक प्रदेश की झीलों में 748.46 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है। पौंग झील उसमें हमेशा प्रथम रहती है। इसकी मार्केटिंग लुधियाना, जालंधर व चंडीगढ़ की बजाए प्रदेश के टूरिज्म विभाग, प्रदेश में स्थित आर्मी की यूनिटों और अन्य एजेंसी के साथ की जाए ताकि प्रदेश में ही इसकी खपत हो सके और सरकार की आय में बढ़ोतरी हो।