मझीण कॉलेज में दो दिवसीय संगोष्ठी का दीप जलाकर शुभारंभ करते हुए मुख्यातिथि। स्रोत: संस्थान
ज्वालामुखी/खुंडियां (कांगड़ा)। मझीण कॉलेज में बुधवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी का विषय हिमाचल प्रदेश का सामाजिक समावेश एवं सतत विकास भावी दृष्टिकोण रहा। पहले दिन के तकनीकी सत्रों में जनजातीय विकास, ग्रामीण सशक्तीकरण, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा में समावेश और नीति निर्माण जैसे विषयों पर उच्च गुणवत्ता वाले शोधपत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद चंडीगढ़ के सहयोग से आयोजित की गई।
कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. चंदन भारद्वाज एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य बलजीत जम्वाल के मार्गदर्शन में हुआ। उद्घाटन सत्र के मुख्यातिथि पूर्व राजनयिक एवं पर्यावरणविद संजीव वत्स रहे। अपने विचारों में उन्होंने सामाजिक समावेश को हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्यों में सतत विकास की अनिवार्य शर्त बताते हुए स्थानीय नीति निर्माण में जन सहभागिता को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। मुख्य वक्ता के रूप में झांडूता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय ठाकुर ने संगोष्ठी के विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी में देशभर से आए विद्वानों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता की। संगोष्ठी की संयोजक डॉ. सरिका रहीं। मंच संचालन की जिम्मेदारी प्रो. मोहिनी ने निभाई। संगोष्ठी में सह संयोजक डॉ. सरवण, डॉ. नीलम, प्रो. आरती गुप्ता, प्रो. मुक्ता मानी, प्रो. लक्की, प्रो. मोहिनी, रंजीत सरोच और पंकज आदि मौजूद रहे।