धर्मशाला। सरकार कृषि के आधुनिकीकरण से किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आधुनिक मशीनों से लैस करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि पावर टिलर (कृषि यंत्र) के लिए आवेदन करने वाले किसान पिछले एक साल से अनुदान (सब्सिडी) की राह देख रहे हैं।
बिजाई का महत्वपूर्ण सीजन सिर पर है, लेकिन सब्सिडी का बजट न आने से किसानों का कृषि इंजन ही बंद पड़ा है। जिले में कुल 8.50 करोड़ रुपये की सब्सिडी राशि लंबे समय से लंबित है। इनमें पावर टिलर के लिए 3.94 करोड़, पुष्पक्रांति योजना के लिए 3 करोड़, मुख्यमंत्री मधु योजना के लिए 1.5 करोड़ और अन्य छोटी योजनाओं के लिए लाखों रुपये का अनुदान उद्यान विभाग में फंसा हुआ है।
किसान सुनील, विपिन और राकेश ने बताया कि उन्होंने 10 से 13 महीने पहले पावर टिलर और ब्रश कटर के लिए आवेदन किया था। निवेश तो उन्होंने कर दिया, लेकिन सब्सिडी का पैसा अब तक उनके खातों में नहीं पहुंचा। किसानों का कहना है कि उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर मशीनें खरीदने की योजना बनाई थी, लेकिन अब सब्सिडी न मिलने से कर्ज का ब्याज भी सिर चढ़कर बोल रहा है। फिलहाल, बिजाई के इस पीक सीजन में किसान बेबस है और सरकार के बजट का इंतजार कर रहा है।
कई किसानों ने पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई, फलदार पौधारोपण और अन्य योजनाओं के तहत निवेश किया, लेकिन समय पर सब्सिडी न मिलने से उन्हें बैंक किस्तें चुकाने में परेशानी हो रही है। सवाल यह है कि यदि खेती के सही समय पर सब्सिडी नहीं मिली, तो इस सरकारी अनुदान का औचित्य ही क्या रह जाएगा। किसानों ने सरकार और विभाग से जल्द राशि जारी करने की मांग उठाई है।
उद्यान विभाग कांगड़ा के उपनिदेशक डॉ. अलक्ष पठानिया ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार की ओर से अभी तक सब्सिडी का बजट जारी नहीं किया गया है। विभाग ने इतना जरूर कहा है कि जैसे ही बजट प्राप्त होगा, लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा कर दिया जाएगा।