नूरपुर (कांगड़ा)। वर्ष 2017 के चुनाव में वन मंत्री राकेश पठानिया के लिए अपनी दावेदारी छोड़ने वाले नूरपुर भाजपा जिला के महामंत्री रणवीर सिंह निक्का को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप के चलते निक्का को भाजपा ने प्राथमिक सदस्यता से बाहर कर दिया है।
2012 में उन्होंने भाजपा टिकट से चुनाव लड़ा था, जिसमें उनको हार मिली थी। इसके बाद 2017 में उनकी टिकट काटी गई। सरकार में उनको अहम जिम्मेदारी देने का वायदा कर बैठाया गया था। पिछले कुछ माह से वह लगातार पार्टी टिकट या निर्दलीय रूप से नूरपुर से चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं। उनके चुनाव लड़ने के एलान के बाद नूूरपुर भाजपा में हलचल मची हुई है।
नूरपुर मंडल भाजपा की बैठक मंडल अध्यक्ष कुलदीप पाठक की अध्यक्षता में हुई। बैठक के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते िनिक्का को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता रद्द करने का सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। कुलदीप पाठक ने कहा कि बैठक में मंडल महामंत्री सुदर्शन ठाकुर ने यह प्रस्ताव रखा कि संगठनात्मक जिला नूरपुर के जिला महामंत्री रणवीर सिंह निक्का पिछले चार सालों से पार्टी व संगठन की किसी भी बैठक में भाग नहीं ले रहे। आए दिन मीडिया व सोशल मीडिया में पार्टी विराधी बयानबाजी कर रहे हैं। गत वर्ष हुए पंचायती राज चुनावों में भी भाजपा समर्थित उमीदवारों के खिलाफ भी अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। इससे भाजपा समर्थित उमीदवारों को काफी नुक्सान हुआ।
मंडल भाजपा ने निक्का को पार्टी से निष्कासित करने के लिए हाईकमान से गुहार लगाई थी। इसका संज्ञान लेते हुए पार्टी ने बीते दिन राजेश काका को नूरपुर जिला का महामंत्री मनोनीत किया है। उन्होंने कहा कि निक्का को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने के बाद मंडल भाजपा ने इनकी प्राथमिक सदस्यता रद्द करने के बारे में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है।
मुझसे कुछ लोगों को खतरा : निक्का
निक्का ने कहा कि भाजपा मंडल द्वारा उनका प्राथमिक सदस्यता रद्द करने का प्रस्ताव बौखलाहट और हताशा का परिणाम है। दरअसल, उनसे कुछ लोगों को खतरा हो गया है। जबकि उनकी सदस्यता रद्द करने या उसको पार्टी से बाहर करने का अधिकार सिर्फ हाईकमान के पास है। निक्का ने मंडल पर आरोप लगाते हुए कहा कि 2012 में भाजपा के विस प्रत्याशी रहे हैं। 2014 तथा 2019 में पार्टी के लोकसभा चुनावों में मोदी और भाजपा के लिए तन-मन-धन से काम किया। उसके बावजूद मंडल की बैठकों में उनको व उनके समर्थकों सम्मान तो दूर, कुर्सी तक नहीं दी जाती थी। ऐसे में बैठकों में जाने का क्या औचित्य। उन्होंने कहा कि अपने समर्थकों के मान -सम्मान के लिए वह हमेशा आवाज उठाते रहे है तथा रहेंगे। यदि भाजपा उनको पार्टी से निकलती है तो वह जनता के दरबार में जाकर लोगों से न्याय मांगेंगे।