धर्मशाला। अब किरायेदारों, पेइंग गेस्ट, घरेलू सहायकों और श्रमिकों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। जिले में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। जिला दंडाधिकारी हेमराज बैरवा ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किए हैं जो 10 अगस्त से 60 दिनों तक प्रभावी रहेंगे। आदेश का उल्लंघन या अवहेलना करने वाले मकान मालिकों, नियोक्ताओं या संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सात दिन के भीतर देनी होगी जानकारी
आदेश के अनुसार मकान मालिकों, संपत्ति स्वामियों, ठेकेदारों और व्यवसाय संचालकों को रहने या काम करने वाले व्यक्तियों का निर्धारित विवरण सात दिनों के भीतर संबंधित पुलिस स्टेशन में जमा कराना होगा। इसमें किरायेदारों, सब-लेटिंग, पीजी, झुग्गियों या अस्थायी आवासों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ घरेलू नौकरों और ठेकेदारों के अधीन कार्यरत श्रमिकों का ब्योरा शामिल है।
सत्यापन की आवश्यकता क्यों?
जिला दंडाधिकारी ने पुलिस रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि जिले में बड़ी संख्या में बाहरी लोग रोजगार व व्यवसाय के सिलसिले में रह रहे हैं। इनमें से कुछ असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त पाए गए हैं। उचित रिकॉर्ड और सत्यापन न होने के कारण अपराधों की रोकथाम व जांच में पुलिस को कठिनाई होती है। सत्यापन से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और जिले की सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी।