नूरपुर (कांगड़ा)। क्षेत्रीय बागबानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र जाच्छ (नूरपुर) के सहनिदेशक डॉ. विपिन गुलेरिया ने किसानों और बागबानों से जुलाई में फलदार पौधे रोपने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि बरसात का मौसम शुरू होने के साथ ही गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में पौधरोपण का सबसे उपयुक्त समय आ जाता है। इस दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी और पानी उपलब्ध रहता है जिससे नए पौधों की जड़ें तेजी से विकसित होती हैं और बढ़वार बेहतर होती है।
उन्होंने बताया कि इस मौसम में आम, संतरा, अमरूद, पपीता और लीची जैसे प्रमुख फलदार पौधों के अलावा हरड़, लसूड़ा, ड्यू, आंवला, गलगल, घरना और कटहल जैसे उपयोगी पौधे रोपे जा सकते हैं। सेब, नाशपाती और व्यावसायिक लकड़ी के लिए प्रसिद्ध पॉपुलर जैसे पौधे सर्दियों के मौसम में लगाए जाते हैं।
डॉ. विपिन गुलेरिया ने बताया कि पहले किसानों को खुली जड़ों वाले पौधे दिए जाते थे लेकिन अब अनुसंधान केंद्र पॉली तकनीक से तैयार पौधे उपलब्ध करवा रहा है। इन पौधों को मार्च में पॉलिथीन बैग में कलम लगाकर तैयार किया जाता है। जुलाई में किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। इस तकनीक में जड़ें सुरक्षित रहने से रोपाई के समय पौधों पर बाहरी या पर्यावरणीय दबाव नहीं पड़ता और वे नई जगह पर आसानी से विकसित हो जाते हैं। रोपाई के बाद सर्दियां आने से पहले पौधों की जड़ें मिट्टी में अच्छी तरह फैल जाती हैं। इससे पौधों के सूखने की आशंका बहुत कम रहती है और उनका सर्वाइवल रेट काफी अधिक होता है। पौधरोपण जुलाई से सितंबर तक किया जा सकता है लेकिन पर्याप्त वर्षा और अनुकूल मौसम के कारण जुलाई का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसलिए किसान और बागबान इस समय का लाभ उठाकर गुणवत्तापूर्ण पौधों का रोपण करें। संवाद